‘प्रधानमंत्री ने डोनाल्ड ट्रंप से कश्मीर पर मध्यस्थता का कभी कोई अनुरोध नहीं किया.’

— एस जयशंकर, विदेश मंत्री

एस जयशंकर ने यह बयान राज्यसभा में डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान पर सरकार की ओर से प्रतिक्रिया देते हुए दिया. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘पाकिस्तान के साथ कोई भी बातचीत सीमा पार से जारी आतंकवाद बंद होने पर होगी और यह लाहौर घोषणापत्र और शिमला समझौते के तहत ही होगी.’ एस जयशंकर का यह भी कहना था, ‘पाकिस्तान के साथ सभी लंबित मुद्दों का समाधान द्विपक्षीय तरीके से किया जाएगा.’ इससे पहले इसी सोमवार को डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि हाल में हुए जी-20 सम्मेलन के दौरान नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए उनसे मध्यस्थता करने की पेशकश की थी.

‘कश्मीर मसले पर डोनाल्ड ट्रंप की पेशकश तारीफ के काबिल है.’ 

— फारुख अब्दुल्ला, जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री

फारुख अब्दुल्ला ने यह बात पत्रकारों से बातचीत करते हुए कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘यह खुशी की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इसे लेकर बात की. साथ ही नरेंद्र मोदी ने उन्हें कश्मीर को जटिल मुद्दा बताया.’ उन्होंने आगे कहा, ‘इस मसले के हल में किसी भी तरह की मदद अच्छी रहेगी.’ इसके साथ ही फारुख अब्दुल्ला का यह भी कहना था, ‘वर्षों से कश्मीर भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव का मुद्दा रहा है. ऐसे में मैं नरेंद्र मोदी को भी बधाई देता हूं कि वे इसे हल करने के लिए सबकुछ करना चाहते हैं.’


‘डोनाल्ड ट्रंप की मध्यस्थता की पेशकश पर भारत की प्रतिक्रिया से मैं हैरान हूं.’ 

— इमरान खान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

इमरान खान ने यह बात एक ट्वीट के जरिये कही. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘कश्मीर विवाद ने पिछले 70 साल से इस क्षेत्र को बंधक जैसा बना दिया है. कश्मीरियों को हर रोज इसका नुकसान उठाना पड़ रहा है. इसकी वजह से कश्मीर की कई पीढ़ियां प्रभावित हुई हैं.’ इसके साथ ही इमरान खान का यह भी कहना था, ‘इस समस्या का हल निकाला जाना चाहिए.’


‘केंद्र सरकार आरटीआई कानून में संशोधन करके इसे खत्म करना चाहती है.’ 

— सोनिया गांधी, कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष

सोनिया गांधी ने यह बात एक बयान जारी करके कही. इसी के जरिये उन्होंने यह भी कहा, ‘2005 में सूचना का अधिकार (आरटीआई) कानून पारित होने के बाद से 60 लाख से भी ज्यादा लोग इसका इस्तेमाल कर चुके हैं. इस कानून ने प्रशासन में विभिन्न स्तरों पर जवाबदेही और पारदर्शिता लाने में मददगार भूमिका निभाई है जिससे देश में लोकतंत्र की बुनियाद को मजबूती मिली है.’ इसके साथ ही सोनिया गांधी का यह भी कहना था, ‘इस कानून ने कमजोर त​बके को भी काफी लाभ पहुंचाया है लेकिन केंद्र की मौजूद सरकार इसे बेमतलब मानती है.’