बीते सोमवार को अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के साथ बातचीत के दौरान यह कहकर भारत को चौंका दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए उनकी मदद मांगी थी. डोनाल्ड ट्रंप ने पत्रकारों से बातचीत में यह भी कहा कि वे इस मुद्दे को हल करने में दोनों देशों की मदद करने के लिए तैयार हैं. ट्रंप के इस बयान को भारत ने सिरे से खारिज कर दिया. भारत ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने कभी भी कश्मीर पर मध्यस्थता के लिए अमेरिकी राष्ट्रपति से ऐसी बात नहीं कही.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयान के बाद यह सवाल उठ रहा है कि अगर नरेंद्र मोदी ने उनसे कश्मीर मुद्दे पर मध्यस्थता की बात नहीं की तो फिर उन्होंने इमरान खान के सामने यह बात क्यों कही. दुनिया भर में ट्रंप के इस दावे को लेकर तमाम तरह की बातें हो रही हैं. लेकिन कुछ जानकार ट्रंप के इस बयान के पीछे तीन वजहें बताते हैं.

डोनाल्ड ट्रंप की अज्ञानता और ज्यादा बोलने की आदत

डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान की वजह ज्यादातर जानकार उनकी अज्ञानता और बड़बोलेपन को बताते हैं. अमेरिका के प्रतिष्ठित अखबार फाइनेंसियल टाइम्स के संपादक एडवर्ड लुइस ट्विटर पर अपनी टिप्पणियों में लिखते हैं कि ‘इस विषय का अगर उन्हें जरा भी ज्ञान होता को वे ऐसा झूठ नहीं बोलते. उनके झूठ की वजह से उनकी सबसे महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं को नुकसान पहुंचा है. लेकिन अपने अपार घमंड के चलते वे इसे समझेंगे नहीं.’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप इससे पहले भी कई बार इस तरह के बयान दे चुके हैं. बीते हफ्ते ही उन्होंने आतंकी हाफिज सईद की गिरफ्तारी को लेकर एक ट्वीट किया था जिसे लेकर दुनिया भर में उनका मजाक उड़ा था. उन्होंने इस ट्वीट में लिखा था, ‘दस साल की खोज के बाद, पाकिस्तान में मुंबई आतंकी हमलों का तथाकथित मास्टरमाइंड गिरफ्तार हो गया है. यह पिछले दो वर्षों में (पाकिस्तान पर) डाले गए भारी दबाव का नतीजा है.’ डोनाल्ड ट्रंप के इस ट्वीट के तुरंत बाद ही अमेरिकी कांग्रेस की विदेश मामलों की समिति ने एक ट्वीट कर कहा कि पाकिस्तान हाफिज सईद को बीते दस साल से नहीं खोज रहा था, वह वहां पूरी आजादी से घूमता है. इस ट्वीट में यह भी कहा गया कि पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान ने उसे कई बार गिरफ्तार किया और फिर छोड़ दिया.

इससे पहले बीते 30 जून को उत्तर कोरिया के शासक किम जोंग-उन से कोरियाई सीमा पर मुलाकात के बाद डोनाल्ड ट्रंप के एक बयान ने अमेरिकी प्रशासन को मुश्किल में डाल दिया था. उन्होंने दक्षिण कोरिया की राजधानी सोल में कहा, ‘हमारी इस मुलाकात के मायने इससे समझे जा सकते हैं कि ऐसी मुलाकातों के लिए पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा ने उत्तर कोरिया से लगातार याचनाएं की थीं...और उसने ठुकरा दी थीं.’ ट्रंप के इस बयान लिए उनके प्रशासन को बाद में सफाई देनी पड़ी थी.

बीते साल दिसंबर में अमेरिकी राष्ट्रपति ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को तब असहज कर दिया जब उन्होंने दावा किया था कि मैक्रों भी उनकी तरह ही पेरिस जलवायु समझौते से परेशान हैं और जल्द ही इससे बाहर होना चाहते हैं. डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान भी पूरी तरह से गलत था क्योंकि इमैनुएल मैक्रों पेरिस जलवायु समझौते के सबसे बड़े पैरोकारों में से एक हैं.

ट्रंप कई बार इस तरह का काम कर चुके हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव के दौरान और बाद में वे यह कहते रहे हैं कि 2015 में परमाणु समझौते के ऐवज में बराक ओबामा ने ईरान को 150 अरब डॉलर दिए थे. जबकि इस समझौते में शामिल रहे अन्य सभी पांच देशों का कहना है कि ऐसा कुछ भी नहीं हुआ था.

बीते साल जून में अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक साक्षात्कार में कनाडा को लेकर जो कहा उसने सभी को हैरान कर दिया. उन्होंने कहा कि कनाडा से अमेरिका को हर साल 100 अरब डॉलर का व्यापार घाटा होता है इसलिए उसे सबक सिखाना जरूरी है. डोनाल्ड ट्रंप का यह बयान पूरी तरह निराधार था. उनकी सरकार के ही आंकड़े बताते हैं कि व्यापार के मामले में अमेरिका कनाडा से घाटे में नहीं, बल्कि फायदे में रहता है, 2018 में अमेरिका उससे सात अरब डॉलर के फायदे में रहा.

अमेरिकी अखबार वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक डोनाल्ड ट्रंप अमेरिका के राष्ट्रपति बनने के बाद से अब तक 10 हजार 796 बार झूठ बोल चुके हैं. इनमें से विदेश नीति को लेकर भी उन्होंने 900 बार सार्वजनिक मंचों पर झूठ बोला है.

लेकिन ये केवल अज्ञानता की वजह से किया गया था. कई जानकारों को इस बात से काफी हैरानी होती कि ट्रंप आखिर कैसे इस तरह के झूठ बोल देते हैं जो कुछ ही मिनटों में पकड़े जा सकते हैं. उदहारण के तौर पर नवंबर 2017 में उन्होंने दावा किया कि टाइम मैगजीन की ओर से उन्हें ‘पर्सन ऑफ द इयर’ बनने का ऑफर दिया गया था जिसे उन्होंने ठुकरा दिया था. उनके इस दावे के चंद मिनटों बाद ही टाइम मैगजीन ने इसे सिरे से खारिज कर दिया और कहा डोनाल्ड ट्रंप झूठ बोल रहे हैं.

दुनिया के सबसे ताकतवर देश का राष्ट्रपति होने का घमंड

डोनाल्ड ट्रंप द्वारा सार्वजनिक तौर पर किसी के बारे में कुछ भी कह देने और दुनिया भर के नेताओं से अजीब व्यवहार करने के पीछे की एक और बड़ी वजह उनके घमंड को माना जाता है. जानकारों की मानें तो उन्हें शायद यह लगता है कि वे दुनिया के सबसे ताकतवर मुल्क के राष्ट्रपति हैं, ऐसे में उन्हें किसी से भी कुछ भी कहने का हक मिला गया है. एडवर्ड लुइस के मुताबिक ‘वे (डोनाल्ड ट्रंप) इस ग्रह के सबसे अहंकारी नेता हैं और पूरी तरह से अज्ञानी भी हैं. उन्हें लगता है कि वे किसी भी समस्या को हल कर सकते हैं, और इसके हल होने में सिर्फ उनकी ही कमी है. इसलिए उन्हें किसी समस्या के बारे में कुछ जानने की जरूरत नहीं है.’

अगर, भारत की ही बात की जाए तो वे पहले भी अपने व्यवहार से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को असहज कर चुके हैं. बीती जनवरी में उन्होंने अफगानिस्तान में एक लाइब्रेरी बनवाने को लेकर नरेंद्र का मजाक उड़ाया था. एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था, ‘जब मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिला था तब मोदी मुझे लगातार बता रहे थे कि उन्होंने अफगानिस्तान में एक लाइब्रेरी बनाई है. मेरे लिए यह सब ऐसा था कि जैसे हमने 5 घंटे साथ में खपा दिए हों. मोदी मुझसे ऐसी उम्मीद कर रहे थे कि मैं यह कह दूं - ओह, लाइब्रेरी के लिए धन्यवाद... लेकिन मुझे नहीं पता कि अफगानिस्तान में लाइब्रेरी का इस्तेमाल कौन कर रहा है.’

इसके अलावा अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय में इस बात की चर्चा कई बार होती रही है कि राष्ट्रपति ट्रंप अक्सर भारतीय लहजे में प्रधानमंत्री मोदी की नकल उतारते हैं. वाशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट में ट्रंप प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रपति को नरेंद्र मोदी की नकल करने के लिए भी जाना जाता है. बीते साल फरवरी में अमेरिकी गवर्नरों को संबोधित करते हुए भी डोनाल्ड ट्रंप ने नरेंद्र मोदी का मजाक उड़ाया था. उन्होंने मोदी की मिमिक्री करते हुए कहा था, ‘वे बहुत सुंदर व्यक्ति है...उन्होंने मुझसे कहा कि हमने हार्ले डेविडसन पर लगने वाले शुल्क को घटाकर अब 50 फीसदी कर दिया है. लेकिन अमेरिका को कुछ नहीं मिला.’ भारतीय प्रधानमंत्री की खिंचाई करते उनका कहना था कि नरेंद्र मोदी सोचते हैं कि वे हमारी मदद कर रहे हैं, लेकिन सच पूछा जाए तो वे हमारी बिलकुल मदद नहीं कर रहे हैं.’

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राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दुनिया भर के तमाम दूसरे नेताओं के साथ भी इस तरह का व्यवहार करने के लिए चर्चा में रहे हैं. बीते साल जुलाई में अमेरिका के अहम सहयोगी ब्रिटेन की यात्रा के समय उन्होंने न केवल वहां की प्रधानमंत्री टेरेसा मे की नीतियों को ब्रिटेन के लिए खराब बताया बल्कि विवादों में घिरे रहने वाले बोरिस जॉनसन के लिए कहा कि वे ब्रिटेन के सबसे अच्छे प्रधानमंत्री साबित हो सकते हैं. डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसा तब किया था जब कुछ ही घंटों बाद उन्हें टेरेसा मे से मुलाकात करनी थी.

2017 में जर्मनी की कुछ नीतियों और नाटो को लेकर उन्होंने जर्मन चांसलर एंगेला मर्केल की भी जमकर आलोचना की थी. इसके बाद मर्केल ने भी ट्रंप को खरी-खरी सुनाई. इसके कुछ महीने बाद अमेरिका दौरे पर पहुंची एंगेला मर्केल से डोनाल्ड ट्रंप ने हाथ भी नहीं मिलाया, जो उस समय काफी सुर्ख़ियों में रहा था. कहा जाता है कि इन दोनों के बीच अभी भी सबकुछ सामान्य नहीं हुआ है.

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बीते साल जून में कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो और डोनाल्ड ट्रंप के बीच तो इतनी ज्यादा कहा-सुनी हुई थी कि अमेरिकी राष्ट्रपति ने जी-7 सम्मेलन के साझा बयान में शामिल होने तक से इनकार कर दिया. इसके बाद वे सम्मेलन बीच में ही छोड़कर अमेरिका वापस आ गए. इस दौरान उन्होंने अमेरिकी उत्पादों पर शुल्क लगाने के लिए जस्टिन ट्रूडो को बेईमान और कमजोर इंसान तक कह डाला था.

डोनाल्ड ट्रंप इमरान खान की चापलूसी में बह गए

लंबे समय से डोनाल्ड ट्रंप की गतिविधियों पर नजर रखने वाले जानकारों का यह भी मानना है कि बीते सोमवार को इमरान खान ने ट्रंप से बातचीत के दौरान जिस तरह से उनकी चापलूसी की उसकी वजह से भी डोनाल्ड ट्रंप कश्मीर पर ऐसा बयान दे बैठे. ये जानकार कहते हैं कि इमरान खान ने जब बार-बार अमेरिकी राष्ट्रपति से यह कहा कि वे दुनिया के सबसे ताकतवर देश के राष्ट्रपति हैं और वे ही कश्मीर मुद्दे को सुलझा सकते हैं. तब बड़बोले ट्रंप इमरान खान की चापलूसी में बह गए और न दिया जाने वाला बयान दे बैठे.

पिछले कुछ समय से पाकिस्तान और अमेरिका के बीच जिस तरह की परस्थितियां बन गयी हैं, उन्हें देखते हुए इमरान खान के लिए डोनाल्ड ट्रंप की चापलूसी करना मजबूरी बन गया था. डोनाल्ड ट्रंप जब से अमेरिका के राष्ट्रपति बने हैं, वे लगातार पाकिस्तान की आलोचना कर रहे हैं. उन्होंने पाकिस्तान को अमेरिका से मिलने वाली मदद भी बंद कर दी है. बीते साल के अंत में जब उन्होंने पाकिस्तान को आतंकवाद के लिए सबसे बड़ा जिम्मेदार देश बताया था तब इमरान खान ने भी ट्रंप की जमकर आलोचना की थी.

जानकारों की मानें तो इमरान खान जानते थे कि डोनाल्ड ट्रंप पाकिस्तान से नाराज हैं और इसलिए उन्होंने अमेरिका यात्रा से कुछ रोज पहले से ही उन्हें खुश करने के प्रयास शुरू कर दिए थे. हाफिज सईद की गिरफ्तारी भी इसी कोशिश का हिस्सा थी. लेकिन, इसके बाद भी जब इमरान खान तीन दिन की अमेरिका यात्रा पर वाशिंगटन एयरपोर्ट पहुंचे तो उन्हें लगा कि उनकी कोशिशें ज्यादा कामयाब नहीं हुई हैं. वाशिंगटन एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए न तो कोई मंत्री और न ही कोई बड़ा अधिकारी पहुंचा. आलम यह था कि वहां उनके लिए किसी वाहन का इंतजाम तक नहीं था. इसके बाद उन्हें मेट्रो ट्रेन से पाकिस्तान हाउस तक जाना पड़ा.

अमेरिकी मीडिया के मुताबिक इसके बाद इमरान खान समझ गए थे कि पाकिस्तान को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन क्या सोचता है और वह उनकी यात्रा को लेकर कितना गंभीर है. इसके बाद जब वे ट्रंप से बातचीत कर रहे थे, तब भी ट्रंप उन पर लगातार अफगानिस्तान को लेकर तंज ही कस रहे थे. बताते हैं कि यह सब देखकर ही उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के दौरान उनकी शान में कसीदे पढ़ने शुरू कर दिए जिसमें ट्रंप फंस गए.

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