केंद्र सरकार ने पिछले कुछ सालों में देश में सांप्रदायिक तनाव में कमी आने का दावा किया है. केंद्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्यसभा में एक सवाल के जवाब में बताया है कि 2013 में सांप्रदायिक घटनाओं के 823 मामले दर्ज किए गए थे, जबकि 2018 में इनकी संख्या घटकर 708 रह गई. किशन रेड्डी ने खुफिया ब्यूरो (आईबी) के आंकड़ों के हवाले से यह दावा किया है. इसके साथ ही उनका कहना था, ‘यह वास्तविकता है कि देश में सांप्रदायिक घटनाओं में कमी आई है. सांप्रदायिक हिंसा या किसी अन्य प्रकार की हिंसा के प्रति हमारी सरकार का इरादा ‘जीरो टॉलरेंस (कतई बर्दाश्त नहीं करने)’ की नीति का पालन करने का है.’

सांप्रदायिक हिंसा के मामलों का रिकॉर्ड दर्ज करने से जुड़े एक सवाल के जवाब में रेड्डी ने जानकारी दी है कि राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) ने 2014 से देश में सांप्रदायिक घटनाओं का रिकॉर्ड दर्ज करना शुरू किया था. हालांकि इसे 2017 में बंद करना पड़ा क्योंकि पहले (आईबी) इन मामलों के जो रिकॉर्ड दर्ज करता था उसमें संबद्ध राज्य सरकारों द्वारा दर्ज प्राथमिकी से भिन्नता पाई गई.

सांप्रदायिक हिंसा रोकने के लिए अलग से कानून बनाने के सवाल पर केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने मौजूदा कानूनों को पर्याप्त बताते हुए कहा कि सांप्रदायिक तनाव और हिंसा से निपटने के लिए नया कानून बनाने की कोई जरूरत नहीं है.