एफबीआई के पूर्व निदेशक रॉबर्ट मूलर ने कहा है कि उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूस की कथित भूमिका को लेकर चली दो साल की अपनी जांच में डोनाल्ड ट्रंप को दोष मुक्त नहीं किया था. मूलर का यह भी कहना है कि इस मामले में वह यह भी नहीं कहेंगे कि राष्ट्रपति ने अपराध किया था. पीटीआई के मुताबिक बुधवार को अमेरिकी संसद के निचले सदन प्रतिनिधि सभा में ‘हाऊस ज्यूडिशयरी कमेटी’ के समक्ष सुनवाई के दौरान रॉबर्ट मूलर ने यह बात कही है.

हाऊस ज्यूडिशयरी कमेटी के समक्ष सुनवाई की शुरूआत में जब उनसे यह पूछा गया कि क्या उनकी रिपोर्ट में राष्ट्रपति को कोई गड़बड़ी करने से बरी कर दिया है, मूलर ने कहा ‘नहीं’. रॉबर्ट मूलर ने आगे कहा, ‘राष्ट्रपति ने जो कृत्य किये हैं उसके लिए वह (ट्रंप) दोषमुक्त नहीं किये गये हैं. यह सच है कि ट्रंप राष्ट्रपति पद से सेवामुक्त होने के बाद न्याय में बाधा डालने को लेकर अभियोजित किये जा सकते हैं.’

इस बीच डेमोक्रेट सांसद तेद लियू ने मूलर से सवाल किया, ‘हर अमेरिकी मूलर रिपोर्ट में खुलासा किये गए अपराध और भ्रष्टाचार को जानने का हकदार है.’ इस पर मूलर ने यह बात दोहराई कि वह अपनी रिपोर्ट में उल्लेख की गई विषय वस्तु के दायरे में रहेंगे. इससे पहले बीते मई में उन्होंने संवाददाता सम्मेलन में कुछ सार्वजनिक टिप्पणियां की थीं, लेकिन सवाल नहीं लिये थे.

2016 के अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव में रूसी दखल पर मूलर अपनी अंतिम रिपोर्ट तीन महीने पहले जारी कर चुके हैं. इस रिपोर्ट के आधार पर अमेरिकी अटॉर्नी जनरल राष्ट्रपति को क्लीन चिट दे चुके हैं. अटॉर्नी जनरल विलियम बर्र ने तब कहा था कि जांच में डोनाल्ड ट्रंप की सीधी संलिप्तता के प्रमाण नहीं मिले हैं, इसलिए उन्हें दोष मुक्त किया जाता है. लेकिन इस जांच के खत्म होने के बाद भी ज्यादातर अमेरिकी नागरिकों के बीच इस बारे में स्थिति अस्पष्ट है कि क्या ट्रंप ने न्याय में बाधा डाली थी और क्या उनके चुनाव प्रचार अभियान में रूस के साथ सांठगांठ की गई थी.

अटॉर्नी जनरल विलियम बर्र द्वारा क्लीन चित मिलने के बाद से डोनाल्ड ट्रंप इस रूसी जांच में खुद को दोषमुक्त बता रहे हैं, जबकि डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता कह रहे हैं कि मूलर की रिपोर्ट में राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य हैं. यही वजह है कि रॉबर्ट मूलर को प्रतिनिधि सभा में डेमोक्रेटिक सांसदों के वर्चस्व वाली दो अलग समितियों के सवालों का सामना करना पड़ रहा है.