दिनभर की चर्चा के बाद गुरुवार को लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पारित हो गया. इस विधेयक के पक्ष में 303 जबकि विरोध में 82 वोट पड़े. वहीं कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी (बसपा), समाजवादी पार्टी (सपा), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (डीएमके) ने इसके विरोध में लोकसभा से वॉकआउट किया. सदन से वॉकआउट करने वालों में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के घटक दलों में से एक जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) भी शामिल रहा.

इससे पहले आज इस विधेयक पर चर्चा की शुरुआत केंद्रीय कानून मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने की. इस मौके पर उन्होंने कहा, ‘यह जाति-धर्म और वोट से जुड़ा हुआ मामला नहीं है. यह मामला सिर्फ नारी और उसे मिलने वाले न्याय का है. इसलिए मैं सदन से आग्रह करूंगा कि इस विधेयक को ध्वनि मत से पारित किया जाए जिससे महिलाओं को न्याय मिल सके.’ वहीं भाजपा नेता मीनाक्षी लेखी ने कहा, ‘काफी विरोध के बावजूद हिंदू कोड बिल लाया गया था. इसका फायदा आज मिल रहा है.’ उन्होंने यह भी कहा, ‘एक समय पर हिंदू समाज में भी बहुविवाह प्रचलित हुआ करता था लेकिन उस पर कानून के जरिये रोक लगाई गई.’

इस दौरान भाजपा के नेता मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा, ‘कुछ लोगों का तर्क है कि इस विधेयक के कानून बनने पर पति जेल चला जाएगा तो घर कौन देखेगा? मैं उनसे कहना चाहता हूं कि कोई जेल जाने लायक काम ही क्यों कर रहा है.’ नकवी ने इसे ‘तर्क के बजाय कुतर्क’ भी करार दिया. इसके साथ ही उनका यह भी कहना था, ‘कुछ लोग वोट बैंक खिसकने के डर से इस विधेयक का समर्थन नहीं करेंगे. लेकिन उन्हें यह देखना चाहिए कि अनेक इस्लामिक देश तीन तलाक पर रोक लगा चुके हैं.’

वहीं चर्चा में भाग में लेते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ‘जब तक मेरी जिंदगी रहेगी मैं तीन तलाक का विरोध करता रहूंगा. यह कानून मुस्लिम महिलाओं के खिलाफ है.’ उनका यह भी कहना था, ‘तीन तलाक को आपराधिक बना दिया गया. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने व्याभिचार और समलैंगिकता को गैर आपराधिक श्रेणी में डाल दिया है.’