गुरुवार को तीन तलाक विधेयक लोकसभा से एक बार फिर पारित हो गया. इस चर्चित विधेयक के समर्थन में 303 और विरोध में 82 वोट पड़े. इस विधेयक में तीन तलाक के लिए जुर्माने और तीन साल तक की सजा का प्रावधान है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. कांग्रेस, बसपा, सपा, तृणमूल कांग्रेस और डीएमके ने इसके विरोध में लोकसभा से वॉकआउट किया. उधर, कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस विधेयक को लेकर कहा, ‘‘यह जाति-धर्म और वोट से जुड़ा हुआ मामला नहीं है. यह मामला सिर्फ नारी और उसे मिलने वाले न्याय का है.’ इससे पहले 16वीं लोकसभा में भी इस विधेयक को लोकसभा ने पारित कर दिया था. लेकिन, राज्यसभा ने इसे मंजूरी नहीं दी थी.

नेशनल हाईवे पर विकलांगों के लिए सुविधाओं को लेकर अधिकांश राज्य सुस्त

देश के आठ राज्यों को छोड़कर अन्य राज्यों ने अब तक राष्ट्रीय राजमार्गों (नेशनल हाईवे) पर विकलांगों को फुटपाथ मुहैया कराने में दिलचस्पी नहीं दिखाई है. ये राज्य हैं - गुजरात, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल, असम, मणिपुर, मिजोरम, नगालैंड और त्रिपुरा. हिन्दुस्तान की खबर के मुताबिक राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग पिछले पांच वर्षों से इससे संबंधित रिपोर्ट मांग रहा है. लेकिन, बाकी राज्यों ने अब तक इसका जवाब नहीं दिया है. बताया जाता है कि आयोग ने एक बार फिर इन राज्यों से रिपोर्ट तलब की है. आयोग के निर्देश पर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने बीती 23 जुलाई को नेशनल हाईवे की देख-रेख कर रहे सभी राज्यों के लोक निर्माण विभाग के सचिवों और चीफ इंजीनियरों को पत्र लिखा है. बताया जाता है कि सभी राज्यों की रिपोर्ट के साथ आयोग 29 जुलाई को एक बैठक करने वाला है.

शेयर बाजार में एफआईआई के रुख से केंद्र सरकार परेशान

शेयर बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) का रुख केंद्र सरकार के लिए परेशानी पैदा करता दिख रहा है. नवभारत टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक एफआईआई शेयर बाजार में लगातार बिकवाली कर रहे हैं. यानी वे शेयर बेचकर अपना निवेश वापस ले रहे हैं. साथ ही, वे अन्य देशों में निवेश कर रहे हैं. बताया जाता है कि केंद्र सरकार इस मसले को गंभीरता से सुलझाना चाहती है. इसके लिए वह जल्द ही एफआईआई से बातचीत कर सकती है. चालू वित्त वर्ष के लिए आम बजट पेश के होने के बाद शेयर बाजार में अनिश्चितता और गिरावट का दौर बना हुआ है. इस दौरान एफआईआई करीब 12,000 करोड़ रुपये की बिकवाली कर चुके हैं.

निचली अदालतों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे और जजों की कमी न्यायपालिका को प्रभावित कर रही है : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों में पर्याप्त बुनियादी ढांचे और जजों की कमी को चिंता का सबब बताया है. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक शीर्ष अदालत ने बच्चियों के साथ बलात्कार से संबंधित सुनवाई के दौरान इस पर अपना पक्ष रखा. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राष्ट्रीय राजधानी के दूर के क्षेत्रों में न्याय अधिकारियों को विपरीत हालात में काम करना पड़ रहा है. न्यायाधीश दीपक गुप्ता और न्यायाधीश अनिरुद्ध बोस की पीठ ने कहा, ‘दिल्ली के साकेत कोर्ट की तुलना अन्य अदालतों से नहीं की जा सकती. हम उन राज्यों की बात कर रहे हैं, जहां बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव है. मजिस्ट्रेट चार गुणा चार साइज वाले चेंबर में बैठते हैं. हमने देखा है और अदालतों की यही सच्चाई है.’ पीठ ने आगे कहा कि मध्य प्रदेश में अब भी प्राइवेसी का मतलब पीड़िता और आरोपित के बीच केवल एक पर्दे को माना जाता है. सुप्रीम कोर्ट का आगे कहना था कि ये कुछ ऐसे मुद्दे हैं जो न्यायपालिका को प्रभावित कर रहे हैं.

मध्य प्रदेश : एक विधेयक पर दो विधायकों के रुख को लेकर भाजपा हाईकमान नाराज

बीते बुधवार को मध्य प्रदेश विधानसभा में दो विधायकों द्वारा पाला बदल कर कांग्रेस का साथ देने पर भाजपा हाईकमान नाराज है. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी अध्यक्ष अमित शाह और कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह से भी फोन पर बातचीत कर इस पर नाराजगी जाहिर की है. अमित शाह ने इस घटना को प्रदेश नेतृत्व की कमजोरी माना है. बताया जाता है कि शिवराज सिंह चौहान दिल्ली में होने वाली संसदीय बोर्ड की बैठक में शामिल होंगे जहां वे इस बारे में अमित शाह को सफाई दे सकते हैं. इससे पहले विधानसभा ने विधि संशोधन विधेयक को शून्य के मुकाबले 122 वोट से पारित कर दिया था. इसमें कांग्रेस सरकार को न केवल बसपा, सपा और निर्दलीयों का समर्थन हासिल हुआ था बल्कि, भाजपा के दो विधायकों का भी उसे साथ मिला.

कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में नवीन जिंदल सहित छह के खिलाफ आरोप तय

दिल्ली की एक निचली अदालत ने मध्य प्रदेश में कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में कांग्रेस नेता नवीन जिंदल सहित छह के खिलाफ आरोप तय कर दिए हैं. राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक इन आरोपितों पर आईपीसी की धारा- 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप तय किए गए हैं. इससे पहले बीती एक जुलाई को अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को सभी आरोपितों के खिलाफ आरोप तय करने का आदेश दिया था. सीबीआई की चार्जशीट में कहा गया है कि साल 2007 में आरोपितों ने राज्य के उरतन नॉर्थ कोयला ब्लॉक को हासिल करने के लिए गलत जानकारी दी थी. नवीन जिंदल झारखंड के एक कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में भी पहले से आरोपितों की सूची में शामिल हैं.