दिल्ली में यमुना नदी किनारे पैदा होने वाली सब्जियां लोगों को सेहतमंद बनाने की जगह नुकसान पहुंचा रही हैं. हिन्दुस्तान टाइम्स ने नेशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीच्यूट (नीरी) के हवाले से कहा है कि इन सब्जियों में हानिकारक तत्व लेड (शीशा) सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा पाया गया है. इसकी वजह से लोगों को कैंसर सहित अन्य गंभीर बीमारियां हो सकती हैं. इससे शरीर के कई अंगों को नुकसान भी पहुंच सकता है.

दिल्ली में यमुना किनारे उगाई जाने वालीं ये सब्जियां थोक मंडियों-आजादपुर, गाजीपुर और ओखला-से पूरे राज्य में पहुंचती हैं. नीरी की शोध रिपोर्ट में बताया गया है कि खुदरा विक्रेताओं से हासिल सभी सब्जियों में लेड की मात्रा सामान्य से कई गुना अधिक पाई गई है. आयरन के प्रमुख स्रोत पालक में यह हानिकारक तत्व सबसे अधिक (14.1 एमजी/किलोग्राम) पाया गया है. फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड अथॉरिटी ऑफ इंडिया (एफएसआई) ने सब्जियों में इसकी सुरक्षित सीमा 2.5 एमजी/किलोग्राम तय की है.

नेशनल एन्वायरनमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीच्यूट के वरिष्ठ वैज्ञानिक एसके गोयल ने बताया, ‘सर्दियों में पैदा होने वाली सात सब्जियों के नमूने उस्मानपुर, मयूर विहार और गीता कॉलोनी से लिए गए थे. इनमें लेड की मात्रा तय भारतीय मानक से अधिक पाई गई. दूसरे तत्वों की मात्रा इन सब्जियों में तय सीमा के अंदर पाई गई.’ उन्होंने आगे कहा कि सब्जियों में लेड के स्रोत ऑटोमोबाइल पार्ट्स, बैटरी, पेंट और पॉलिथीन हो सकते हैं.

बताया जाता है कि राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (एनजीटी) द्वारा गठित एक समिति ने इस अध्ययन का काम नीरी को बीते फरवरी में सौंपा था. इसके बाद बीते मई में इस रिपोर्ट को प्राधिकरण के सामने रखा गया था. इससे पहले साल 2015 में एनजीटी ने हानिकारक तत्वों की मौजूदगी चलते यमुना किनारे अनाजों और सब्जियों की खेती पर रोक लगा दी थी. लेकिन, इसे अब तक नहीं रोका जा सका है.