निर्देशक: रोहित जुगराज
कलाकार: दिलजीत दोसांझ, कृति सेनन, सीमा पाहवा, रोनित रॉय, जीशान अय्यूब
रेटिंग: 2/5

‘अर्जुन पटियाला’ एक पटकथा लेखक और फिल्म निर्माता की मुलाकात के दृश्य से शुरू होती है. इसमें लेखक अपनी कहानी सुनाने की जिद पकड़े बैठा है जिस पर निर्माता कहता है कि वह तीन पीढ़ियों से फिल्में बना रहा है लेकिन आज तक एक कहानी नहीं सुनी. यह फिल्म का पहला और सबसे मारक पंच है. ‘अर्जुन पटियाला’ के साथ बुरा यह है कि जैसे क्लाइमैक्स के बाद इसमें लेखक और निर्माता सोते हुए नज़र आते हैं, वैसे ही दर्शक भी उबासियां लेते हुए थिएटर से बाहर निकलते दिखाई देते हैं. इसकी इकलौती वजह यही लगती है कि यह हल्की-फुल्की फिल्म बनाने वालों ने शायद अपना काम भी हल्के में ही लिया था.

ऑनेस्ट या स्पूफ शैली में बनाई गई ‘अर्जुन पटियाला’ एक ऐसा प्रयोग है जो नया, मजेदार और एंगेजिंग तो है लेकिन पूरी तरह सफल नहीं कहा जा सकता. पटकथा सुनाने के बहाने से इस शैली को फिल्म में फिट किया गया है और सॉन्ग सिचुएशन, एक्शन, फ्लैशबैक और क्लाइमैक्स को बोलकर बताया गया है. यहां पर गड़बड़ी यह है कि इसे ही फिल्म की यूएसपी मान लिया गया. इसके उलट होना यह चाहिए था कि सबकुछ बताकर भी खास दृश्य कुछ ऐसे रचे जाते कि देजा-वू वाला रोमांच दर्शकों पर छा जाता. अगर आपने इसी फॉरमेट में बनी मार्वल की डेडपूल सीरीज की फिल्में देख रखी हैं तो ‘अर्जुन पटियाला’ आपको बुरी तरह निराश करेगी.

‘अर्जुन पटियाला’ में शीर्षक भूमिका निभा रहे दिलजीत दोसांझ फिल्म को जान देते हैं. स्क्रीन पर उनका होना ही आपको उत्साह और मनोरंजन दोनों देता है. उनकी मासूमियत उनके किरदार के लिए एकदम फिट बैठती है और इसे लिखने में बरती गई कोताही की थोड़ी भरपाई भी उनके मजेदार अभिनय से हो जाती है. दोसांझ के साथ ज्यादातर वक्त वरुण शर्मा नज़र आते हैं जो अपने फुकरे वाले किरदार को ही जीते हैं. वहीं, नायिका होने के बाद भी कृति सेनन के हिस्से में गिनती के ही दृश्य आए हैं. लेकिन वे जहां भी नज़र आती हैं, दोसांझ के साथ अपनी केमिस्ट्री से खुश करती हैं. इनके अलावा फिल्म में सीमा पाहवा, रोनित रॉय, जीशान अय्यूब भी हैं और देखने लायक हैं.

‘अर्जुन पटियाला’ की सबसे बड़ी खामी इसके किरदारों को गढ़ने में बरती गई लापरवाही है. यहां तक कि नायिका की कहानी बताने के लिए भी फिल्म बमुश्किल एक मिनट का वक्त लेती है. हालांकि इस दौरान स्क्रीन पर कुछ बढ़िया इलस्ट्रेशन देखने को मिलते हैं लेकिन छिछली बातों के चलते उनका असर भी जाता रहता है. सीमा पाहवा और रोनित रॉय के किरदारों को भी जरूरी तवज्जो न मिलना अखरने वाला है.

इस फिल्म से पंजाबी फिल्म निर्देशक रोहित जुगराज ने बॉलीवुड में एंट्री की है. इससे पहले वे दिलजीत दोसांझ के साथ पंजाबी में बेहद पॉपुलर हॉरर-कॉमेडी सीरीज ‘सरदार जी’ बना चुके हैं लेकिन इस बार उनका जादू नहीं चल पाया है. ‘अर्जुन पटियाला’ की अस्त-व्यस्त सीक्वेंसिंग और गानों की बुरी टाइमिंग के चलते रोमांचक कामेडी के कई मौके वे बुरी तरह चूक गए हैं.

थोड़ी तारीफ करनी हो तो कहा जा सकता है कि फिल्म में कुछ संवाद बहुत कमाल के हैं लेकिन इनमें से ज्यादातर फिल्म के ट्रेलर में देखे-सुने जा चुके हैं. इसके साथ ही कई दृश्य और सीक्वेंस ऐसे हैं जो बॉलीवुड में दिखाए जाने वाले क्लीशे दृश्यों की तो जमकर खिल्ली उड़ाते हैं. लेकिन इतना सब करने के बाद भी अर्जुन पटियाला अपने आपको ऐसा ही एक क्लीशे उदाहरण बन पाने से नहीं बचा पाती. अगर आपको कृति सेनन बहुत-बहुत खूबसूरत और दिलजीत दोसांझ बहुत-बहुत-बहुत क्यूट लगते हैं तो ही इस फिल्म का टिकट बुक करिए. बाकी, टीवी या इंटरनेट पर इसके आने का इंतजार करना ज्यादा फायदेमंद सौदा होगा.