भारतीय सेना की मारक क्षमता में इजाफा करने वाले एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों की पहली खेप भारत पहुंच गई है. खबरों के मुताबिक शनिवार को इन्हें दिल्ली से सटे गाजियाबाद के हिंडन एयरबेस पर उतारा गया. अब अगले ही हफ्ते और चार हेलीकॉप्टरों की खेप भारत पहुंचेगी. इसके बाद अगस्त के अंत तक इन आठों हेलीकॉप्टरों को पठानकोट एयरबेस पर तैनात कर दिया जाएगा. ये हेलीकॉप्टर वहां मौजूद एमआई-35 हेलीकॉप्टरों की जगह लेंगे.

इससे पहले सेना के आधुनिकीकरण को ध्यान में रखते हुए नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली पिछली सरकार ने सिंतबर 2015 में अमेरिका के साथ ऐसे 22 हेलीकॉप्टरों का करार किया था. इसके जरिये 2020 तक भारत को ऐसे 22 हेलीकॉप्टर मिलने हैं. इन्हें अमेरिका की बोइंग कंपनी ने तैयार किया है. इसके अलावा बोइंग दुनियाभर में ऐसे 2200 हेलीकॉप्टर बेच चुकी है. अमेरिका ने इन हेलीकॉप्टरों को 1984 में अपनी सेना में शामिल किया था.

एएच-64ई अपाचे हेलीकॉप्टरों की विशेषताओं पर नजर डालें तो इन्हें रडार से पकड़ पाना बेहद मुश्किल है. इनकी अधिकतम रफ्तार 280 किलोमीटर प्रतिघंटा है. साथ ही ये एक बार में पौने तीन घंटे की उड़ान भरने की क्षमता रखते हैं. नाइट विजन सिस्टम से लैस होने की वजह से ये रात में भी दुश्मन की टोह लेने के साथ मिसाइलों के जरिये घातक प्रहार करने में सक्षम हैं. इनकी उड़ान में कोई मौसम बाधक नहीं बन पाता और सबसे बड़ी बात यह कि इस हेलीकॉप्टर के पास एंटी टैंक मिसाइल के जरिये वार करने की क्षमता भी मौजूद है.