‘राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए न तो किसी दबाव में काम होगा और न ही किसी प्रभाव में.’

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंंत्री

नरेंद्र मोदी ने यह बात कारगिल विजय के 20 साल पूरे होने के मौके पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान कही. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘आज युद्ध की प्रकृति बदल गई है. आतंकवाद रूपी छद्म युद्ध के जरिये आज दुनिया और मानवता को चुनौती दी जा रही है. युद्ध में पराजित हुए लोग अपने राजनीतिक उद्देश्यों को पूरा करने के लिए इसका इस्तेमाल कर रहे हैं.’ इस मौके पर प्रधानमंत्री ने कारगिल युद्ध के शहीदों को सलाम करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी. साथ ही उस युद्ध को देश के ‘बेटे-बेटियों की बहादुरी की जीत’ बताते हुए उन्होंने कहा, ‘मैं उन बहादुर माताओं को भी नमन करता हूं जिन्होंने उन बहादुरों को जन्म दिया.’

‘आजम खान की अमर्यादित टिप्पणी के लिए उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए.’

— रमा देवी, भारतीय जनता पार्टी की सांसद

रमा देवी ने यह बात एक बातचीत के दौरान कही. इस मौके पर उन्होंने लोकसभा से आजम खान के निलंबन की मांग करते हुए यह भी कहा, ‘अब अगर समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसद आजम खान माफी भी मांगते हैं तो भी मैं उन्हें माफ नहीं कर पाऊंगी.’ इसके साथ ही रमा देवी का कहना था, ‘हर पुरुष की मां, बहन, बेटी और पत्नी होती है. लेकिन उनके बयान से न सिर्फ महिलाओं का अपमान हुआ बल्कि पुरुषों की गरिमा को भी उससे ठेस पहुंची है.’ इससे पहले बीते गुरुवार को लोकसभा में तीन तलाक विधेयक पर चर्चा के दौरान आजम खान ने रमा देवी को लेकर एक विवादित टिप्पणी की थी.


‘भ्रष्टों को चोरी करने में मदद पहुंचाने के लिए केंद्र सरकार आरटीआई कानून को कमजोर कर रही है.’

— राहुल गांधी, कांग्रेस के नेता

राहुल गांधी ने यह बात एक ट्वीट के जरिये केंद्र सरकार पर तंज कसते हुए कही. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘आश्चर्यजनक है कि आमतौर पर भ्रष्टाचार के खिलाफ मुखर रहने वाली भीड़ अचानक गायब हो गई है.’ इससे पहले बीते गुरुवार, को लोकसभा के बाद राज्यसभा ने भी सूचना का अधिकार (आरटीआई) संशोधन विधेयक पारित कर दिया था.


‘जम्मू-कश्मीर एक राजनीतिक समस्या है जिसका समाधान सैन्य संसाधनों के जरिये नहीं निकाला जा सकता.’

— महबूबा मुफ्ती, जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री

महबूबा मुफ्ती ने यह बयान एक ट्वीट के जरिये कश्मीर में सरकार की तरफ से की गई अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती पर दिया. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘भारत सरकार को अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करने और अपनी नीति को बदलने की जरूरत है.’ इसके साथ ही महबूबा मुफ्ती का यह भी कहना था, ‘कश्मीर में सुरक्षा बलों की कोई कमी नहीं है. साथ ही दस हजार सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती से घाटी के लोगों के मन में डर पैदा हो रहा है.’


‘ममता बनर्जी की तुष्टीकरण की नीति का राज्य के सामाजिक सद्भाव पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है.’

— केसरीनाथ त्रिपाठी, पश्चिम बंगाल के पूर्व राज्यपाल

केसरीनाथ त्रिपाठी ने यह बात पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को नसीहत देते हुए कही. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘ममता बनर्जी के पास अपने फैसलों को लागू कराने की क्षमता है लेकिन उन्हें संयमित होकर काम करना चाहिए. कई मौकों पर वे भावनात्मक हो जाती हैं जिस पर नियंत्रण जरूरी है.’ केसरीनाथ त्रिपाठी ने आगे कहा, ‘बीते कुछ समय के दौरान राज्य में काफी हिंसा देखने को मिली है. ऐसे में कानून-व्यवस्था में सुधार लाने की दिशा में भी उन्हें कदम उठाने चाहिए.’