उत्तर प्रदेश में उन्नाव बलात्कार मामले की पीड़िता के साथ हुई सड़क दुर्घटना को लेकर भाजपा विधायक कुलदीप सिंह सेंगर सहित 10 आरोपितों और 15-20 अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज किया गया है. इस खबर को आज के अधिकतर अखबारों ने पहले पन्ने पर जगह दी है. बताया जाता है कि रायबरेली के गुरुबख्शगंज थाने में पीड़िता के चाचा महेश सिंह की शिकायत पर यह मामला दर्ज हुआ है. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि जेल में बंद भाजपा विधायक अपने साथियों के नंबर पर फोन मिलाकर पीड़ित परिवार को धमकी देते थे कि अगर उन्हें जिंदा रहना है तो सारे मुकदमों में बयान बदल दें.

रेलवे में पार्सल की जिम्मेदारी निजी हाथों को देने की तैयारी

आने वाले दिनों में ई-कॉमर्स कंपनी एमेजॉन के कर्मचारी रेलवे स्टेशनों पर भी पार्सल की जिम्मेदारी संभालते हुए दिख सकते हैं. दैनिक जागरण की रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय रेलवे ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर कंपनी को दो राजधानी ट्रेनों में यह जिम्मेदारी दी है. बताया जाता है कि एक महीने बाद इसकी समीक्षा कर इसका दायरा बढ़ाया जा सकता है. खबर के मुताबिक अन्य निजी कंपनियों को भी इस काम में लगाया जा सकता है. वहीं, इस फैसले पर पार्सल कर्मचारियों ने अपनी नाराजगी जाहिर की है. भारतीय रेलवे लोडिंग अनलोडिंग वर्कर यूनियन के अध्यक्ष राजकुमार इंदीरिया ने कहा है कि बिना किसी टेंडर के यह काम एमेजॉन को दे दिया गया है. उन्होंने 31 जुलाई और एक अगस्त को दिल्ली में इसके खिलाफ हड़ताल का एलान किया है.

पूर्व सैनिकों के लिए स्वास्थ्य योजना - ईसीएचएस को बंद करने की तैयारी

भारतीय सेना एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम (ईसीएचएस) को बंद करने की तैयारी में है. नवभारत टाइम्स की खबर के मुताबिक सेना की दक्षिणी कमान ने मिलिट्री अस्पताल का अध्ययन करने के लिए एक बोर्ड बनाया है. यह बोर्ड इस बात की जांच करेगा कि इस अस्पताल की कितनी क्षमता है औ जहां मिलिट्री अस्पताल हैं क्या वहां ईसीएचएस बंद की जा सकती है. वहीं, कमान ने अस्पतालों को यह भी निर्देश दिया है कि यदि वे पूर्व सैनिकों का भार सहन कर सकते हैं तो अपने क्षेत्र में इस योजना को बंद करने की सिफारिश भेजें. ईसीएचएस पूर्व सैनिकों के लिए एक स्वास्थ्य योजना है. इस योजना के करीब 52 लाख लाभार्थी (पूर्व सैनिक और उनके परिवार के सदस्य) हैं.

सरकार करदाताओं के पैसे को धार्मिक कार्यों पर खर्च नहीं कर सकती : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया है कि सरकार करदाताओं के पैसे को धार्मिक कार्यों पर खर्च नहीं कर सकती. अमर उजाला में प्रकाशित खबर के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस संबंध में गुजरात हाई कोर्ट के आदेश को खारिज कर दिया. इस आदेश में अदालत ने गुजरात दंगों (2002) में क्षतिग्रस्त 500 धर्मस्थलों के पुनर्निर्माण का खर्च देने के लिए कहा था. सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के इस फैसले को कानून के खिलाफ बताया है. पीठ ने कहा, ‘सरकार को धर्मस्थलों की मरम्मत का निर्देश नहीं दिया जा सकता है क्योंकि, इससे धर्मनिरपेक्षता का तानाबाना प्रभावित होगा.’ सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना है कि इससे संवैधानिक प्रावधान का उल्लंघन भी होगा.

दिल्ली मेट्रो में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामलों में इस साल तेज बढ़ोतरी

दिल्ली मेट्रो में महिलाओं के साथ छेड़छाड़ के मामलों में इस साल के पहले छह महीनों में ही 2016 के मुकाबले 43 फीसदी बढ़ोतरी हो चुकी है. साल 2016 में इस तरह की कुल 77 शिकायतें दर्ज की गई थीं. वहीं, जून, 2019 तक यह आंकड़ा 110 तक पहुंच चुका है. हिन्दुस्तान ने केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की एक रिपोर्ट के हवाले से कहा है कि महिला यात्रियों को ट्रेन में प्रवेश करने और बाहर निकलने के दौरान छूने, धक्का देने और अपशब्द जैसी मुश्किलो का सामना करना पड़ता है. उधर, सीआईएसएफ के असिस्टेंट इंस्पेक्टर जनरल हेमेंद्र सिंह ने बताया कि इस तरह के मामलों की संख्या में बढ़ोतरी की वजह यात्रियों की तादाद बढ़ना भी है. सुरक्षा बल का कहना है कि महिला सुरक्षा के लिए ‘काली’ नाम से एक टीम का गठन किया गया है, जो कोच में छेड़छाड़ की कोशिश करने वालों की पहचान करती है.

न्यायाधीशों के यहां होने वाली शादियों में नेताओं को आमंत्रित किया जाना और वकीलों की पार्टी में जजों का जाना चिंताजनक : पूर्व न्यायाधीश एपी शाह

देश में न्यायाधीशों के व्यवहार पर दिल्ली हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एपी शाह ने बड़ा सवाल खड़ा किया है. राजस्थान पत्रिका की खबर के मुताबिक उन्होंने कहा, ‘न्यायाधीशों के यहां होने वाली शादियों में नेताओं को आमंत्रित किया जाना और वकीलों की पार्टी में जजों का जाना चिंताजनक है.’ पूर्व न्यायाधीश ने आगे कहा, ‘जजों के दिमाग में कोई पूर्व निर्धारित नैतिक कोड नहीं होता है, जो कुर्सी पर बैठने के दौरान उनके व्यवहार को निर्धारित करे.’ एपी शाह ने इसके लिए ब्रिटेन का उदाहरण दिया. उन्होंने बताया कि ब्रिटेन की आचार संहिता में न्यायाधीशों का वकीलों की पार्टी में जाना गलत माना जाता है. पूर्व न्यायाधीश ने सलाह दी है कि जजों को लगातार यह याद दिलाया जाना चाहिए कि सही व्यवहार क्या है ताकि उनके ऊपर जिस निष्पक्ष न्याय की जिम्मेदारी डाली गई है, वह इससे कभी समझौता न करे.