विश्व कप खत्म होने के दो हफ्ते बाद आईसीसी ने टेस्ट क्रिकेट को लेकर एक बड़ी घोषणा की है. बीते सोमवार को उसने बहुप्रतीक्षित ‘आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप’ का कार्यक्रम घोषित कर दिया. इसका आगाज एक अगस्त से इंग्लैंड में खेली जाने वाली ‘एशेज सीरीज’ से होगा. यह टेस्ट चैंपियनशिप करीब दो साल चलेगी और इसमें टेस्ट खेलने वाली शीर्ष नौ टीमें हिस्सा लेंगी. इन टीमों के बीच 27 द्विपक्षीय टेस्ट सीरीजों के तहत 71 मैच खेले जाएंगे. आईसीसी के मुताबिक हर मैच में निर्धारित अंक होंगे जो मैच के नतीजे के हिसाब से टीमों को आवंटित किए जाएंगे. सभी 71 मैच खेले जाने के बाद सबसे ज्यादा अंक हासिल करने वाली शीर्ष दो टीमों के बीच इंग्लैंड में जून 2021 में फाइनल मुकाबला खेला जाएगा. इस मुकाबले को जीतने वाली टीम ही टेस्ट चैंपियनशिप की विजेता कहलाएगी.

हालांकि, कहानी बस इतनी ही नहीं है. आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से जुड़े कई और तथ्य भी ऐसे हैं जिन्हें जानने की जरूरत है. इस चैंपियनशिप की घोषणा के साथ ही आईसीसी ने कई पुराने नियमों में भी बदलाव को हरी झंडी दिखा दी है. आइए इन सबके बारे में जानते हैं.

आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में हिस्सा लेने वाली टीमें

आईसीसी टेस्ट रैंकिंग की शीर्ष नौ टीमें विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा होंगी. ये टीमें हैं - भारत, न्यूजीलैंड, दक्षिण अफ्रीका, इंग्लैंड, ऑस्ट्रेलिया, श्रीलंका, पाकिस्तान, वेस्टइंडीज और बांग्लादेश. इन टीमों का चयन 31 मार्च, 2018 को आईसीसी टेस्ट रैंकिंग के आधार पर किया गया है. क्रिकेट की सर्वोच्च संस्था की ओर से यह भी कहा गया है कि अगले दो सालों में इन नौ टीमों में से कोई भी टीम अगर अफगानिस्तान, आयरलैंड और जिम्बाब्वे के साथ कोई टेस्ट सीरीज खेलती है तो वह सीरीज टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा नहीं होगी.

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का प्रारूप

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में सभी नौ टीमों में से प्रत्येक टीम को तीन सीरीज घर में और तीन अन्य देशों में खेलनी होंगी. प्रत्येक टेस्ट सीरीज में मैचों की संख्या दो से लेकर अधिकतम पांच तक हो सकती है. यानी सभी टेस्ट सीरीजों में मैचों की संख्या समान नहीं होगी.

यही वजह है कि इस चैंपियनशिप के दौरान सभी टीमें एक बराबर छह सीरीज तो खेलेंगी, लेकिन उनके कुल मैचों की संख्या अलग-अलग होगी. इस दौरान इंग्लैंड सर्वाधिक 22 टेस्ट मैच खेलेगा क्योंकि उसे चार और पांच मैचों की सबसे ज्यादा टेस्ट सीरीज खेलनी हैं. दो साल की टेस्ट चैंपियनशिप के दौरान ऑस्ट्रेलिया और भारत 18 मैच, दक्षिण अफ्रीका और वेस्टइंडीज 15 मैच और बांग्लादेश और न्यूजीलैंड 14 मैच खेलेंगे. दो साल की अवधि में पाकिस्तान और श्रीलंका की टीमें सबसे कम केवल 13-13 मैच ही खेलेंगी.

अंकों का बंटवारा

आईसीसी विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में प्रत्येक सीरीज़ के लिए कुल 120 अंक होंगे. इन 120 अंकों को सीरीज में होने वाले कुल मैचों की संख्या के आधार पर बांट दिया जाएगा. उदाहरण के लिए, दो टेस्ट मैचों की सीरीज में प्रत्येक टेस्ट मैच के लिए 60 अंक होंगे तो वहीं तीन मैचों की सीरीज में प्रत्येक टेस्ट मैच के लिए 40 अंक. यहां मैच जीतने वाली टीम को पूरे अंक और हारने वाली टीम को शून्य मिलेगा. आईसीसी द्वारा दी की गई जानकारी के मुताबिक टाई हुए मैचों में दोनों टीमों को जीत के मुकाबले आधे अंक मिलेंगे और ड्रॉ होने पर जीत के एक-तिहाई अंक दिए जाएंगे.

फोटो : आईसीसी / यूट्यूब

अंकों के बंटवारे की इस प्रणाली पर आईसीसी के महाप्रबंधक ज्योफ अलार्डिस ईएसपीएन क्रिकइन्फो से बातचीत में कहते हैं, ‘किसी भी प्रतियोगिता का एक सामान्य नियम यह है कि हर एक टीम को एक समान अंकों के लिए प्रतिस्पर्धा करनी होती है. प्रत्येक टीम को तीन सीरीज घरेलू और तीन विदेशी मैदानों पर खेलनी हैं और हमने प्रत्येक सीरीज के लिए एक बराबर अंक देने का फैसला किया है.’

ज्योफ अलार्डिस यह भी बताते हैं कि आईसीसी ने सभी देशों को एक और विकल्प भी दिया था. इसके तहत किसी भी टेस्ट सीरीज के केवल पहले दो मैचों को ही टेस्ट चैंपियनशिप का हिस्सा माना जाए और इन्हीं दो मैचों को 120 अंक दे दिए जाएं. हालांकि सभी देशों ने दूसरे विकल्प को नकार दिया.

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल अगर ड्रॉ या टाई रहा तो क्या होगा?

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप का फाइनल अगर ड्रॉ या टाई रहता है तो दोनों टीमों को संयुक्त विजेता घोषित किया जाएगा. हालांकि, आईसीसी ने रिजर्व डे यानी अतिरिक्त दिन का भी विकल्प दिया है. लेकिन, ऐसा तभी होगा जब पांचों दिन के कुल खेल समय में कुछ नुकसान हुआ हो. एक टेस्ट मैच के लिए पांच दिनों में कुल 30 घंटे (छह घंटे रोज) का समय निर्धारित है. आईसीसी के मुताबिक अगर बारिश या किसी अन्य वजह से पांचों दिनों में 30 घंटे से कम समय का खेल हो पाता है तो उस समय की भरपाई छठे यानी अतिरिक्त दिन में की जा सकती है.

खिलाड़ियों की ड्रेस में बदलाव

आईसीसी क्रिकेट के सबसे लंबे प्रारूप को लोकप्रिय बनाने के उद्देश्य से इस विश्व टेस्ट चैंपियनशिप में बहुत कुछ नया भी करने जा रहा है. इसके तहत उसने खिलाड़ियों की जर्सी में एक बदलाव किया है. आईसीसी के मुताबिक अब टेस्ट क्रिकेट में भी खिलाड़ियों की जर्सी पर उनके नाम और नंबर लिखे जाएंगे.

टेस्ट क्रिकेट की नई जर्सी में न्यूजीलैंड के खिलाड़ी

विश्व टेस्ट चैंपियनशिप से पहले नियमों में बदलाव

टीमों की जर्सी के अलावा भी आईसीसी ने टेस्ट क्रिकेट के कई नियमों में फेरबदल किया है. आईसीसी ने पहला बदलाव मैच के धीमे ओवर-रेट को लेकर किया है. अभी तक धीमे ओवर-रेट यानी टेस्ट मैच के दौरान कम ओवर फेंकने पर जुर्माने के तौर पर कप्तान की मैच फीस में कटौती या फिर उसे कुछ मैचों में खेलने से रोकने का नियम है. लेकिन अब नए नियम के अनुसार टेस्ट चैंपियनशिप के अंतर्गत खेले जाने वाले मैचों में धीमे ओवर-रेट के लिए टीम के अंकों में कटौती की जाएगी. मैच के बाद हर कम ओवर के लिए दो अंक काटे जाएंगे. नए नियमों के मुताबिक टेस्ट चैंपियनशिप से इतर होने वाले टेस्ट मैचों में फीस काटने की सजा दी जाएगी. लेकिन यह सजा केवल कप्तान को नहीं, बल्कि पूरी टीम को मिलगी. यानी धीमे ओवर-रेट के लिए सजा के तौर पर पूरी टीम के सदस्यों की मैच फीस में कटौती की जाएगी.

‘कन्कशन सब्स्टिट्यूट’

आईसीसी ने सब्स्टिट्यूट खिलाड़ी से जुड़े नियम में बड़े संशोधन को भी मंजूरी दी है. नए नियम के मुताबिक अगर कोई खिलाड़ी चोटिल होता है तो उसकी जगह दूसरा खिलाड़ी टीम में शामिल किया जा सकेगा. यह खिलाड़ी गेंदबाजी, बल्लेबाजी और विकेटकीपिंग भी कर सकेगा. ऐसे खिलाड़ियों को ‘कन्कशन सब्स्टिट्यूट’ कहा जाएगा. यह नियम टेस्ट क्रिकेट के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के सभी प्रारूपों और प्रथम श्रेणी क्रिकेट में भी लागू होगा.

नए नियम के मुताबिक ‘कन्कशन सब्स्टिट्यूट’ पर निर्णय टीम का मेडिकल रिप्रेजेंटेटिव लेगा और इसे मैदान पर उतारने का फैसला मैच रेफरी करेगा. नियम में स्पष्ट है कि जिस फील्ड का खिलाड़ी चोटिल हुआ है, वैसा ही खिलाड़ी टीम में लिया जा सकता है. उदाहरण के तौर पर बल्लेबाज की जगह बल्लेबाज या गेंदबाज की जगह गेंदबाज ही टीम में शामिल किया जा सकता है.