अमे​ठी के राज परिवार से संबंध रखने वाले और गांधी परिवार के करीबी माने जाने वाले संजय सिंह ने कांग्रेस और राज्यसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है. खबरों के मुताबिक मंगलवार को उन्होंने यह घोषणा एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये की. इस मौके पर उन्होंने कांग्रेस में नेतृत्व का अभाव बताया साथ ही कहा, ‘बीते 15-20 सालों से पार्टी में संवादहीनता की स्थिति बनी हुई है.’

इसी मौके पर संजय सिंह ने यह भी कहा, ‘कांग्रेस आज भी अतीत में जी रही है और यह भविष्य से अनजान है. दूसरी तरफ आज सारा देश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ है. यदि पूरा देश उनके साथ है तो मैं भी उनके साथ हूं. मैं कल (बुधवार) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल होने जा रहा हूं.’ इससे पहले कांग्रेस ने उन्हें असम से राज्यसभा में भेजा था. राज्यसभा सांसद के तौर पर उनका कार्यकाल फिलहाल एक साल बचा हुआ था.

अस्सी के दशक में कांग्रेस से राजनीतिक पारी की शुरुआत करने वाले संजय सिंह के लिए यह पहला मौका नहीं जब उन्होंने इस पार्टी का साथ छोड़ने का फैसला किया है. इससे पहले 1988 में वे कांग्रेस छोड़ जनता दल के साथ जुड़ गए थे. उस दौरान उन्होंने अमेठी संसदीय सीट से चुनाव भी लड़ा था. हालांकि वहां के वोटरों ने उनका साथ नहीं दिया था और चुनाव हार गए थे. इसके बाद 1998 में उन्होंने भाजपा की टिकट पर इस संसदीय सीट पर जीत दर्ज की थी. हालांकि इसके अगले ही साल सोनिया गांधी ने अमेठी से चुनाव लड़ते हुए एक बार फिर वहां कांग्रेस का परचम लहरा दिया था.

फिर कुछ और समय तक भाजपा में रहने के बाद 2003 में वे कांग्रेस में वापस लौट गए थे. इसके अलावा 2009 में कांग्रेस के टिकट पर उन्होंने सुल्तानपुर से चुनाव लड़ा था और उन्हें यहां से जीत मिली थी. लोकसभा के पिछले चुनाव में भी संजय सिंह ने सुल्तानपुर संसदीय सीट से ही अपनी किस्मत आजमाई थी लेकिन तब भाजपा प्रत्याशी मेनका गांधी के सामने उन्हें हार का सामना करना पड़ा था.