तीन तलाक विधेयक आज राज्यसभा से भी पारित हो गया है. तीन तलाक विधेयक यानी मुस्लिम महिलाएं (शादी में अधिकारों का संरक्षण) विधेयक-2019 के पक्ष में राज्यसभा में 99 वोट पड़े तो वहीं विरोध में 84 सदस्यों ने वोट दिया. यह विधेयक 25 जुलाई को लोकसभा में पारित हुआ था और अब इसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिलते ही यह कानून बन जाएगा.

इस विधेयक के जरिए मुस्लिम समुदाय में प्रचलित एक बार में तीन तलाक कहकर, लिखकर या फिर किसी इलेक्ट्रॉनिक तरीके से यह संदेश भेजकर शादी तोड़ने की प्रथा को अपराध बनाया गया है. इसके तहत दोषी पाए जाने पर पति को अधिकतम तीन साल की कैद और उसकी तरफ से महिला और उसके बच्चों को गुजारा भत्ता दिए जाने का प्रावधान है.

भाजपा की अगुवाई वाले सत्ताधारी एनडीए गठबंधन का संसद के उच्च सदन में बहुमत नहीं है और इसके चलते मोदी सरकार के पिछले कार्यकाल में यह विधेयक यहां से पारित नहीं हो पाया था. लेकिन इस बार सरकार अपनी कोशिश में कामयाब रही. आज उसे अप्रत्यक्ष रूप से कई विपक्षी पार्टियों की मदद मिली. एनडीए में शामिल जनता दल – यूनाइटेड (जदयू) पहले से इस विधेयक के विरोध में रही है और आज उसने वोटिंग के दौरान सदन से वॉक आउट किया था. उसके अलावा विपक्षी पार्टियों एआईएडीएमके और तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) ने भी सदन से वॉक आउट किया. वहीं आज राज्यसभा में कम से कम 14 सदस्य मौजूद नहीं थे, जिनमें भाजपा के अरुण जेटली, कांग्रेस के ऑस्कर फर्नांडीज और राष्ट्रवादी कांग्रेस (एनसीपी) के शरद पवार और प्रफुल्ल पटेल भी शामिल हैं. इसके चलते एनडीए ने राज्यसभा में आसानी से इस बिल को पारित करा लिया.

कांग्रेस सहित दूसरी विपक्षी पार्टियां इस विधेयक का यह कहकर विरोध करती रही हैं कि इस पर और विचार-विमर्श के लिए इसे सिलेक्ट कमेटी में भेजा जाना चाहिए. इनकी सबसे बड़ी आपत्ति है कि तीन तलाक विधेयक में मौजूद पतियों को तीन साल कैद के प्रावधान का मुसलमानों के खिलाफ दुरुपयोग हो सकता है.