प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जल्दी ही डिस्कवरी चैनल की लोकप्रिय टीवी सीरीज ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ में नज़र आने वाले हैं. सोमवार को शो के एंकर बेयर ग्रिल्स ने इस खास एपीसोड का प्रोमो ट्विटर पर पोस्ट किया. इस वीडियो की चर्चा न सिर्फ सोशल मीडिया बल्कि दुनिया भर का मीडिया कर रहा है. इसके साथ ही, कुछ लोग इस बात का अंदाजा लगाते हुए भी दिखे कि क्या पुलवामा हमले वाले दिन प्रधानमंत्री इसी कार्यक्रम की शूटिंग में व्यस्त थे?

बीती 14 फरवरी को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा जिले में केंद्रीय रिज़र्व सुरक्षा बल के दस्ते पर आत्मघाती हमला हुआ था. इस हमले में 40 जवान मारे गए थे. हमले की जिम्मेदारी पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश-ए-मुहम्मद ने ली थी. लेकिन उस समय की मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस हमले की सूचना प्रधानमंत्री तक पहुंचने में काफी समय लग गया था. इसके लिए उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल भी विपक्ष और मीडिया के निशाने पर रहे थे.

हमले के कई दिनों बाद तक यह चर्चा जोरों पर रही कि आखिर घटना के वक्त प्रधानमंत्री कहां थे? इसका पहला जवाब विपक्षी पार्टी कांग्रेस लेकर आई. हमले के एक हफ्ते बाद कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाया कि ‘जब सारा देश जवानों की मौत का शोक मना रहा था. उस समय प्रधानमंत्री मोदी कॉर्बेट नेशनल पार्क में नाव पर सैर करते हुए घड़ियालों को देख रहे थे.’ सुरजेवाला ने विस्तार से प्रधानमंत्री के उस दिन का ब्यौरा देते हुए यह तक बताया कि ‘प्रधानमंत्री मोदी उस दिन साढ़े छह बजे तक शूटिंग कर रहे थे. इसके बाद पौने सात बजे तक उन्होंने चाय-नाश्ता किया. यह बहुत डराने वाला है कि इतने बड़े हमले के चार घंटे बाद तक मोदी जी अपनी ब्रांडिंग, फोटोशूट और नाश्ते में ही व्यस्त थे.’

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रणदीप सुरजेवाला के इन आरोपों के बाद तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष, राहुल गांधी ने नरेंद्र मोदी की कुछ तस्वीरें (नीचे) भी ट्विटर पर पोस्ट कीं. इनके बारे में दावा किया गया था कि ये तस्वीरें 14 फरवरी को हुई शूटिंग के दौरान खींची गईं थीं.

इसके बाद राहुल गांधी के इस ट्वीट का जवाब भाजपा के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से दिया गया था. इस ट्वीट में कांग्रेस पर हमलावर होते हुए भाजपा ने विपक्ष को शहीदों से जुड़े मसले पर राजनीति न करने की सलाह तो दी लेकिन प्रधानमंत्री का पक्ष मजबूत करने वाली कोई बात नहीं कही. इतने संवेदनशील पर पार्टी का यह आक्रामकता भरा लेकिन बेमतलब जवाब इस मामले को अविश्वास की नज़रों से देखे जाने की पहली वजह दे देता है.

कांग्रेस की तरफ से लगाए गए इन आरोपों, सरकार और उनके समर्थकों की तरफ से किए जाने वाले बचाव और सरकारी तंत्र की आलोचनाओं के बीच कुछ समाचार चैनलों ने जिस तरह से इस पर रिपोर्टिंग की वह भी खटकने वाला है. उस समय ये चैनल इस पूरे विवाद की वजह एनएसए अजीत डोभाल को ठहराते दिखे थे. न्यूज एक्स और न्यूज18 इंडिया ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अजीत डोभाल से इस बात के लिए बेहद नाराज़ हैं कि वे आतंकी हमले की सूचना उन्हें समय पर नहीं दे सके. इसके साथ ही इन रिपोर्टों में एनएसए डोभाल की तरफ से यह सफाई देने की बात भी थी कि प्रधानमंत्री उस दिन उत्तराखंड के रुद्रपुर में एक चुनावी रैली को संबोधित करने गए थे जहां नेटवर्क ठीक न होने के चलते उनसे समय पर संपर्क नहीं किया जा सका था.

इन मीडिया रिपोर्टों के बारे में पहली बात जो इन्हें अविश्वसनीय बनाती है, वह है इनकी टाइमिंग. ये सभी खबरें कांग्रेस द्वारा आरोपों की झड़ी लगाए जाने के बाद प्रसारित की गई थीं. यहां पर यह सवाल भी किया जा सकता है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अजीत डोभाल के बीच इतनी संवादहीनता है कि उन्हें डोभाल पर नाराजगी जताने में सात दिन का समय लग जाए? और अगर ऐसा है भी तो यह बात मीडिया तक क्यों पहुंची? इसके अलावा अगर रुद्रपुर से तमाम टीवी चैनलों के जरिए मोदीजी की चुनावी रैली का सीधा प्रसारण किया जा सकता था, तो फिर एक फोन कॉल के लिए नेटवर्क न मिलने की बात जरा गले नहीं उतरती है. देश के प्रधानमंत्री से अगर राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बात करना चाहे और वह सिर्फ खराब फोन नेटवर्क की वजह से न हो सके यह सोच पाना जरा मुश्किल है.

फिर भी अगर नेटवर्क न मिलने वाली बात को सही मान भी लिया जाए तो इससे उस आशंका को मजबूती मिल जाती है कि प्रधानमंत्री उस समय रुद्रपुर शहर में नहीं बल्कि उससे तकरीबन 80 किमी दूर कॉर्बेट के जंगल में थे. प्रधानमंत्री के कॉर्बेट नेशनल पार्क पहुंचने के वीडियो यूट्यूब पर आसानी से खोजकर देखे जा सकते हैं.

अब ‘मैन वर्सेस वाइल्ड’ और इसके एंकर बेयर ग्रिल्स पर आएं तो ग्रिल्स की आखिरी भारत यात्रा और इस शो की शूटिंग से जुड़ी कुछ बातें भी रहस्यमयी लगती हैं. बीती 26 जनवरी और 12 फरवरी को ग्रिल्स ने भारत से जुड़े कुछ ट्वीट किये थे जिसमें उन्होंने भारत पहुंचने और कुछ बेहद रोमांचक काम करने का जिक्र किया गया था. ये दोनों ही ट्वीट पुलवामा हमले के बाद चुपचाप इस तरह से हटा लिए गए कि इनके स्क्रीनशॉट तक अब उपलब्ध नहीं हैं. लेकिन बेयर ग्रिल्स के कुछ फैन्स ने ट्विटर और इंस्टाग्राम पर उनके साथ अपनी जो तस्वीरें अपलोड की थीं, वे भी इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि 14 फरवरी के आसपास ग्रिल्स भारत में ही थे.

मार्च में प्रकाशित हुई इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट की मानें तो अखबार ने बेयर ग्रिल्स और डिस्कवरी चैनल से जब यह बात जाननी चाही कि क्या वे फरवरी में भारत में शूटिंग कर रहे थे तो दोनों में से किसी ने भी अखबार के मेल का कोई जवाब नहीं दिया. इतना ही नहीं, यह रिपोर्ट ये भी बताती है कि उत्तराखंड के वन विभाग से जब यह पूछा गया कि क्या किसी फिल्म क्रू को 14 फरवरी को कॉर्बेट टाइगर रिजर्व में शूटिंग करने की इजाजत दी गई थी, तो उसने इस पर कोई भी टिप्पणी करने से इंकार कर दिया था. इस मामले से जुड़ी एक जानकारी यह भी थी कि इस तारीख को वन विभाग ने सारी टूरिस्ट बुकिंग को कैंसिल कर कर दिया था जिसका कारण प्रधानमंत्री की यात्रा बताया गया था.

और अब, सरकार के सूत्रों के हवाले से खबर आई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 14 फरवरी को कॉर्बेट नेशनल पार्क में यह शूटिंग तो की थी. तकरीबन 45 मिनट तक चली यह शूटिंग पुलवामा अटैक से करीब आधे घंटे पहले यानी शाम तीन बजे ही खत्म हो गई थी. सरकार की तरफ से अनाधिकारिक तौर पर की गई यह स्वीकारोक्ति ऊपर के सभी अंदाजों पर लगभग मुहर लगा देती है. लेकिन फिर भी कुछ सवाल बाकी रह जाते हैं. मसलन, अगर बात इतनी सी ही थी तो पहले सरकार और खुद मोदी जी की तरफ से यह जानकारी देने में इतनी देर क्यों की गई. इसके अलावा, वे क्या वजहें थी जिसके चलते डिस्कवरी चैनल और उत्तराखंड वन विभाग इस शूटिंग के बारे में कोई भी जानकारी देने से बचते रहे? यह सब इस आशंका को मजबूती देते हैं कि दाल में कुछ काला तो है!