पिछले दिनों दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का निधन हो गया. वे दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की अध्यक्ष भी थीं. लोकसभा चुनावों के पहले प्रदेश अध्यक्ष पद से पार्टी के वरिष्ठ नेता अजय माकन के इस्तीफे के बाद उन्हें एक बार फिर से दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपी गई थी. अधिक उम्र होने की वजह से शीला दीक्षित के साथ तीन कार्यकारी अध्यक्ष भी बनाए गए थे.

अब जब शीला दीक्षित नहीं हैं और दिल्ली में विधानसभा चुनावों में छह महीने से भी कम का वक्त बचा है तो कांग्रेस में नए प्रदेश अध्यक्ष की काफी जरूरत महसूस की जा रही है. एक तरफ जहां दिल्ली में भाजपा और आम आदमी पार्टी पूरी तरह से चुनावी मोड में आ गए हैं, वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस की ओर से अब भी विधानसभा चुनावों की तैयारियों के मामले में कोई खास सुगबुगाहट नहीं दिख रही है.

पार्टी नेताओं से बात करने पर पता चलता है कि दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के प्रभारी पीसी चाको से स्थानीय नेता कई बार मिले हैं और उनसे अनुरोध किया गया है कि जल्दी से जल्दी नए प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति की जाए ताकि विधानसभा चुनाव की तैयारी शुरू हो सके. अब ऐसे में सवाल यह उठता है कि आम आदमी पार्टी और भाजपा से मुकाबले के लिए प्रदेश कांग्रेस की कमान किस नेता को मिलने वाली है.

इस बारे में प्रदेश कांग्रेस के अलग-अलग नेताओं से बातचीत करने पर कुछ नाम उभरकर सामने आ रहे हैं. सबसे पहला नाम पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री अजय माकन का है. लोकसभा चुनावों के पहले अजय माकन ने औपचारिक तौर पर यह कहते हुए इस्तीफा दिया था कि उनका स्वास्थ्य ठीक नहीं है. लेकिन उस वक्त भी अधिकांश लोगों ने यही कहा था कि अजय माकन ने खराब सेहत की वजह से नहीं बल्कि लोकसभा चुनावों को लेकर दिल्ली में अपनाई जाने वाली रणनीति पर अलग राय रखने की वजह से इस्तीफा दिया था.

दिल्ली प्रदेश कांग्रेस की राजनीति में पिछले कई सालों से शीला दीक्षित और अजय माकन के अलग-अलग खेमे रहे. अब जब शीला दीक्षित नहीं हैं तो प्रदेश स्तर पर कांग्रेस के सबसे ताकतवर नेता अजय माकन हैं. ऐसे में पार्टी नेताओं को लग रहा है कि वे फिर से एक बार प्रदेश अध्यक्ष बनकर पार्टी को दिल्ली में अपने हिसाब से चलाना चाहेंगे.

इस बारे में कांग्रेस के एक नेता कहते हैं, ‘पिछली बार अजय माकन चाहकर भी कुछ प्रयोग नहीं कर पा रहे थे क्योंकि उन्हें भी पता था कि गांधी परिवार से नजदीकी की वजह से शीला दीक्षित की बातों को वे नजरअंदाज नहीं कर सकते. लेकिन अब अगर वे प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो इस बार उन्हें काम करने की अधिक छूट होगी.’

अजय माकन के पक्ष में यह बात भी जा रही है कि उनकी उम्र अपेक्षाकृत कम है. वे अभी 55 साल के हैं. दिल्ली के मौजूदा मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल 50 साल के हैं. भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी 48 साल के हैं. ऐसे में कांग्रेस के अंदर एक मांग यह चल रही है कि 50 साल के आसपास उम्र वाले किसी नेता को ही प्रदेश अध्यक्ष बनाया जाए.

अपेक्षाकृत कम उम्र के प्रदेश अध्यक्ष की मांग से दिल्ली के प्रभावशाली नेताओं में शुमार किए जाने वाले और सांसद रहे जयप्रकाश अग्रवाल की प्रदेश अध्यक्ष पद पर दावेदारी कमजोर पड़ रही है. वे पहले भी प्रदेश अध्यक्ष रहे हैं. कई बार वे सांसद रहे हैं. दिल्ली के लोगों पर उनकी काफी अच्छी पकड़ है. कांग्रेस में उनके बारे में ये कहा जाता है कि वे एकदम नीचे के स्तर के कार्यकर्ताओं तक को जानते हैं और दिल्ली के पुराने इलाकों के लोगों से उनका सीधा संवाद है. इस वजह से प्रदेश स्तर के कई नेता उन्हें प्रदेश कांग्रेस की कमान देने की मांग कर रहे हैं. लेकिन 74 साल के जयप्रकाश अग्रवाल के लिए उनकी अपेक्षाकृत अधिक उम्र सबसे बड़ी बाधा के तौर पर दिख रही है.

अजय माकन और जयप्रकाश अग्रवाल के अलावा दिल्ली प्रदेश कांग्रेस के दो कार्यकारी अध्यक्ष के नामों को लेकर भी चर्चा है. राजेश लिलोठिया अभी कार्यकारी अध्यक्ष हैं. कुछ पार्टी नेता 50 साल के राजेश लिलोठिया को भी प्रदेश कांग्रेस की कमान सौंपने की मांग कर रहे हैं. नाम न छापने की शर्त पर इनमें से एक नेता कहते हैं, ‘युवा कांग्रेसी नेता के तौर पर अपनी एक अलग पहचान रखने वाले लिलोठिया के आने से पार्टी को युवाओं पर एक बार फिर पकड़ बनाने में सुविधा होगी.’

राजेश लिलोठिया के साथ बतौर कार्यकारी अध्यक्ष काम कर रहे हारून यूसुफ का नाम भी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के लिए चल रहा है. युसूफ 61 साल के हैं, लेकिन उनके पक्ष में कई बातें कही जा रही हैं. दिल्ली की एक सीट से कांग्रेस पार्टी के एक पूर्व लोकसभा सांसद उनकी दावेदारी के बारे में कहते हैं, ‘शीला दीक्षित सरकार में हारून यूसुफ कई महत्वपूर्ण विभागों के मंत्री रहे. इस नाते उन्हें प्रदेश की राजनीति के लिहाज से अनुभवी कहा जा सकता है. पार्टी में आम तौर पर उनकी छवि सबको साथ लेकर चलने वाले नेता की रही है. ऐसे में अगर वे प्रदेश अध्यक्ष बनते हैं तो पार्टी को इसका फायदा मिल सकता है.’

हारून यूसुफ को प्रदेश अध्यक्ष बनाने से होने वाले फायदों के बारे में वे कहते हैं, ‘लोकसभा चुनावों में कांग्रेस का वोट प्रतिशत आप से अधिक रहा. दिल्ली में आप बहुत तेजी से ताकतवर इसलिए हुई कि मुस्लिम समाज के लोगों ने पूरी तरह से एकजुट होकर उसके पक्ष में मतदान किया. लेकिन लोकसभा चुनावों में कांग्रेस के मत प्रतिशत में हुई बढ़ोतरी इस बात का संकेत है कि मुस्लिम समाज का आप से मोहभंग हो रहा है. अगर यूसुफ को प्रदेश कांग्रेस की कमान दी जाती है तो संभव है कि मुस्लिम समाज एक बार फिर से कांग्रेस के पक्ष में आ जाए. अगर ये वर्ग पूरी तरह से कांग्रेस के पक्ष में आ गया तो इससे दिल्ली में कांग्रेस के बुरे दिन खत्म हो सकते हैं.’

इन सबके अलावा दिल्ली कांग्रेस के अगले मुखिया के लइए पंजाब सरकार में पूर्व मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू और कुछ समय पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए शत्रुघ्न सिन्हा के नाम पर भी कयास लग रहे हैं. सिद्धू के पक्ष में दिल्ली में पंजाबी समुदाय की बड़ी आबादी को कारण बताया जा रहा है तो शत्रुघ्न सिन्हा के पक्ष में राजधानी में पूर्वांचलियों की बड़ी तादाद की दलील दी जा रही है.

बहरहाल, इन नामों की चर्चा तो चल रही है, लेकिन प्रदेश स्तर का कोई नेता यह बताने को तैयार नहीं है कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति कब तक होगी. इस बारे में पार्टी के एक नेता कहते हैं, ‘पीसी चाको से जब भी कोई प्रदेश स्तर का नेता मिल रहा है तो उनसे आग्रह कर रहा है कि प्रदेश अध्यक्ष की नियुक्ति जल्द से जल्द हो. मेरी जितनी उनसे बात हुई, उससे अभी यह पता नहीं चल पाया है कि उनका झुकाव किस नेता की ओर है. लेकिन मेरा अनुमान है कि राहुल गांधी की जगह कांग्रेस के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष के चयन तक दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के चयन का मामला नहीं रुके. मुझ लगता है कि अगले कुछ दिनों में इस बारे में कोई घोषणा हो सकती है.’