पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की हालिया अमेरिका यात्रा को पाकिस्तान में बड़ी कूटनीतिक सफलता बताया जा रहा है. अमेरिका से लौटने के बाद खुद इमरान खान ने कहा कि उन्हें ऐसा लगता है कि जैसे वे दूसरी बार विश्व कप जीतकर लौटे हैं. जानकार उनकी इस ख़ुशी की दो वजह बताते हैं. इनमें पहली कश्मीर मुद्दे पर डोनाल्ड ट्रंप का बयान है. दूसरी और सबसे प्रमुख वजह अफगानिस्तान को लेकर अमेरिका और पाकिस्तान के बीच हुई बातचीत है.

पाकिस्तान में इमरान खान की इस यात्रा को बड़ी कूटनीतिक सफलता इसलिए भी माना जा रहा है कि कुछ महीने पहले तक दोनों के संबंध बेहद ख़राब थे. बीते साल सितंबर में डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को दी जाने वाली 1.3 अरब डॉलर (करीब 9,000 करोड़ रुपए) की सालाना मदद बंद कर दी थी. अमेरिका पाकिस्तान को तालिबान से लड़ने और अफगानिस्तान में अमेरिकी सेना की मदद के बदले सालों से यह आर्थिक मदद दे रहा था. इस घोषणा के दौरान डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान पर अफगानिस्तान के मामले में धोखेबाजी करने का आरोप भी लगाया था. इसके जवाब में इमरान खान ने भी कई ट्वीट कर अमेरिकी राष्ट्रपति को खरी-खोटी सुनाई थी.

हालांकि, इसके महीने भर बाद ही अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन ने इमरान खान को अमेरिका और तालिबान के बीच चल रही शांति वार्ता में सहयोग के लिए पत्र लिखा. इसके बाद पाकिस्तान के अधिकारियों ने शांति वार्ता से जुड़े अमेरिकी अधिकारियों का सहयोग भी किया, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इसके बावजूद पाकिस्तान को रुकी हुई आर्थिक मदद बहाल नहीं की और न ही वहां की सरकार से बातचीत की कोई इच्छा जतायी.

खराब संबंधों के बाद भी इमरान खान की अमेरिका यात्रा कैसे संभव हुई?

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक इसके बाद से ही इमरान खान अमेरिका यात्रा की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बात नहीं बन पा रही थी. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो इस मामले में पाकिस्तानी प्रधानमंत्री की मदद सऊदी अरब के शहजादे मोहम्मद बिन सलमान और अमेरिका की सत्ताधारी रिपब्लिकन पार्टी के दिग्गज नेता लिंडसे ग्राहम ने की.

पाकिस्तानी अखबार एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने इस मामले की जानकारी रखने वाले एक अधिकारी के हवाले से बताया, ‘इमरान खान डोनाल्ड ट्रंप की चिट्ठी आने के बाद से ही इस कोशिश में थे कि उनसे आमने-सामने बातचीत हो सके. प्रधानमंत्री ऐसा इसलिए चाहते थे क्योंकि उनका मानना था कि इस तरह की बैठक से अमेरिकी राष्ट्रपति की पाकिस्तान को लेकर बनी गलत धारणाओं को दूर किया जा सकता है और उन्हें अफगानिस्तान मामले में पाकिस्तान की भूमिका को भी अच्छे से समझाया जा सकता है.’

इस अधिकारी की मानें तो दिक्कत यह थी कि पाकिस्तान और अमेरिका के खराब संबंधों की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन बैठक करवाने को तैयार नहीं था. ऐसे में वे संभावनाएं तलाशी गईं जिनके जरिये अमेरिकी नौकरशाही को दरकिनार कर बैठक करवाने के लिए सीधे डोनाल्ड ट्रंप से संपर्क साधा जा सके.

इस पाकिस्तानी अधिकारी के मुताबिक इसके बाद इमरान खान के कार्यालय ने इस मामले में मदद के लिए सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान से संपर्क किया. बिन सलमान ने डोनाल्ड ट्रंप के दामाद जेरेड कुशनर के जरिये इमरान खान की बैठक का कार्यक्रम तय करवाया. मोहम्मद बिन सलमान के जेरेड कुशनर से बेहद करीबी रिश्ते हैं, कुशनर इस समय मध्यपूर्व मामलों पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार भी हैं.

पाकिस्तानी मीडिया के मुताबिक अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भी डोनाल्ड ट्रंप और इमरान खान की मुलाकात करवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी. लिंडसे ग्राहम को डोनाल्ड ट्रंप का करीबी माना जाता है और वे ट्रंप की अफगानिस्तान से निकलने की नीति के भी बड़े पैरोकार हैं. बीते जनवरी में जब ग्राहम पाकिस्तान यात्रा पर गए थे तो इमरान खान से खासे प्रभावित हुए थे. उस समय उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को इमरान खान से बातचीत की सलाह देते हुए कहा था कि राष्ट्रपति ट्रंप इमरान खान से जब भी बातचीत करेंगे तो वे इस क्षेत्र (अफगानिस्तान) को लेकर पाकिस्तानी प्रधानमंत्री के विचारों से निश्चित ही उत्साहित होंगे.

इमरान खान के पूरी बातचीत अफगानिस्तान पर ही केंद्रित रखने की वजह

डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के दौरान इमरान खान ने अधिकांश बातचीत अफगानिस्तान पर ही केंद्रित रखी. उन्होंने बार-बार कहा कि वे अमेरिका के अफगानिस्तान से निकलने में उनकी मदद के लिए तैयार खड़े हैं. इमरान खान ने अमेरिकी राष्ट्रपति से कहा, ‘इस समय तालिबान के साथ शांति वार्ता पहले की तुलना में काफी अच्छी चल रही है...मुझे पूरी उम्मीद है कि आने वाले दिनों में मैं राजनीतिक समाधान के लिए अफगानिस्तान की सरकार और तालिबान से बातचीत कर पाऊंगा.’

डोनाल्ड ट्रंप से बातचीत के अगले दिन वाशिंगटन में ‘यूनाइटेड स्टेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ पीस’ के एक कार्यक्रम में उन्होंने यह भी बताया कि तालिबान उनसे बातचीत करने को तैयार है. इमरान खान ने कहा, ‘तालिबान का एक प्रतिनिधिमंडल कुछ महीने पहले मुझसे मिलना चाहता था, लेकिन अफगान सरकार की आपत्तियों के कारण हमें यह बैठक रद्द करनी पड़ी.’ पाक प्रधानमंत्री का आगे कहना था, ‘अब मैं वापस जाकर तालिबान से मिलूंगा और पूरी कोशिश करूंगा कि उनकी अफगान सरकार से बात करवाऊं ताकि अफगानिस्तान के चुनाव समावेशी हों और तालिबान भी इसमें भाग ले सके.’

जानकारों की मानें तो डोनाल्ड ट्रंप ने इमरान खान से साफ तौर पर कह दिया है कि अगले राष्ट्रपति चुनाव से पहले वे हर हाल में अफगानिस्तान से निकलना चाहते हैं और इसके लिए उन्हें तमाम क्षेत्रीय देशों की मदद की जरूरत है. ये जानकार कहते हैं कि इमरान खान जैसे तेजतर्रार नेता को अच्छे से पता है कि ऐसी स्थिति का कैसे फायदा उठाया जाता है. यही वजह थी कि उन्होंने पूरी बातचीत को न केवल अफगानिस्तान पर केंद्रित रखा बल्कि, कई बार अमेरिकी राष्ट्रपति को तालिबान से चल रही शांति वार्ता में पूरे सहयोग का आश्वासन भी दिया. दरअसल, इमरान खान जानते हैं कि उन्हें इस समय अमेरिका से अच्छे संबंध बनाने का सुनहरा मौका मिला है और ये संबंध पाकिस्तान के लिए आर्थिक मोर्चे के साथ-साथ सामरिक स्तर पर भी बड़े मददगार साबित हो सकते हैं.

अमेरिका से मधुर संबंधों के लिए इमरान खान ने बहुत कुछ और भी किया

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच बातचीत में कई और बातें भी ऐसी हुई हैं जिनसे पता लगता है कि अब दोनों देशों के संबंध मधुर होने वाले हैं. बताया जाता है कि इमरान खान और डोनाल्ड ट्रंप के बीच यह भी तय हुआ है कि नौकरशाहों की जगह अब दोनों ज्यादातर मुद्दों पर सीधी बातचीत ही किया करेंगे. इमरान ने इस यात्रा के दौरान उन रुकावटों को भी दूर करने का प्रयास किया, जो भविष्य में डोनाल्ड ट्रंप द्वारा पाकिस्तान को मदद की घोषणा करने पर आड़े आ सकती हैं. इसके लिए उन्होंने अमेरिकी संसद के निचले सदन की स्पीकर और दिग्गज डेमोक्रेट नैन्सी पेलोसी से मुलाकात की. इस मुलाकात को पाक प्रधानमंत्री की उस कवायद का हिस्सा माना जा रहा है जिसके तहत वे डेमोक्रेटिक पार्टी के वर्चस्व वाले निचले सदन का रुख पाकिस्तान के प्रति नरम करना चाहते हैं.

नैन्सी पेलोसी से मुलाकात के दौरान इमरान खान ने अमेरिकी सांसदों को विश्वास दिलाते हुए कहा, ‘अमेरिका के नेताओं और सांसदों के बीच अब तक पाकिस्तान का सही नजरिया नहीं पेश किया गया. मुझे लगता है कि यह समय अमेरिका के साथ अलग तरह का संबंध बनाने का है.’ इमरान खान इस दौरान भी अफगानिस्तान का जिक्र करना नहीं भूले, उन्होंने कहा, ‘अमेरिका और पूरी दुनिया शांति से अफगानिस्तान में चल रही लड़ाई को ख़त्म करना चाहते हैं...मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि पाकिस्तान अपनी पूरी कोशिश करेगा कि जल्द से जल्द अफगानिस्तान का शांतिपूर्ण समाधान निकले.’