बॉम्बे हाई कोर्ट ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से पूछा है कि ऐसी क्या मजबूरी है जो वह करेंसी नोटों के साइज और उनकी दूसरी विशेषताओं में बार-बार बदलाव कर रहा है अदालत के मुताबिक नोटबंदी ने साबित कर दिया है कि जाली नोटों के अर्थव्यवस्था में प्रचलन को लेकर जो धारणा थी वह गलत थी. नोटबंदी के बाद से आरबीआई ने कई पुराने नोटों की जगह पर नए नोट जारी किए थे. नए नोट जारी करने का यह सिलसिला अभी जारी है.

मुख्य न्यायाधीश प्रदीप नंदराजोग और न्यायमूर्ति एनएम जामदार की खंडपीठ नेशनल असोसिएशन ऑफ द ब्लाइंड (एनएबी) नाम के एक संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही है. एनएबी की याचिका में दावा किया गया है कि आरबीआई द्वारा जारी किए गए नए नोटों और सिक्कों में बार-बार होने वाले बदलावों से नेत्रहीनों को इन्हें पहचानने और इनमें फर्क करने में दिक्कत हो रही है.

बीस रु का नया नोट

पीटीआई के मुताबिक मुख्य न्यायाधीश नंदराजोग ने कहा, ‘हम आरबीआई से जानना चाहते हैं कि नोटों में आकार जैसी विशिष्टताओं में लगातार बदलाव करने के पीछे क्या विवशता है.’ उनका आगे कहना था कि दुनिया में कोई अन्य देश अपने नोटों के आकार और विशिष्टताओं में इतनी जल्दी-जल्दी बदलाव नहीं करता. हाई कोर्ट ने कहा कि अमेरिका ने डॉलर के नोट का साइज कभी नहीं बदला, लेकिन हमारे यहां 10,20, 50 और यहां तक कि 100 का नोट भी बदल दिया गया है. अदालत ने आरबीआई से इस मुद्दे पर छह हफ्ते के भीतर जवाब देने को कहा है.