कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने अमरनाथ यात्रा स्थगित करने और पर्यटकों को कश्मीर छोड़ने के दिशानिर्देश को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना की है. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा है, ‘इसकी वजह से कश्मीर के लोगों में डर और आशंका का माहौल पैदा हुआ है.’ गुलाम नबी आजाद ने आगे कहा, ‘केंद्र सरकार का यह फैसला उन लोगों को व्यापक तौर पर प्रभावित करेगा जिनकी आजीविका पर्यटन के बल पर ही चलती है.’ कांग्रेस नेता ने ये बातें आज एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहीं.

इसी मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘आज का माहौल काफी कुछ 90 के दशक जैसा है. उस वक्त ‘भगवा दल’ ने तत्कालीन प्रधानमंत्री वीपी सिंह पर जम्मू-कश्मीर में अपना गवर्नर नियुक्त करने का दबाव बनाया था. तब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कश्मीरी पंडितों को जम्मू ले जाने के लिए बसों और परिवहन के दूसरे साधनों का बंदोबस्त भी किया था. उसी तरह भाजपा फिर एक बार कश्मीर के वातावरण में डर पैदा कर रही है.’

गुलाम नबी आजाद ने आगे कहा, ‘जम्मू-कश्मीर में जब आतंकवाद अपने चरम पर था तो उस वक्त भी पर्यटकों को लेकर कश्मीर में कभी ऐसा दिशानिर्देश जारी नहीं किया गया. इसके अलावा अमरनाथ यात्रा के दौरान पहले भी हथियार बरामद होते रहे हैं लेकिन उसकी वजह से कभी यात्रा नहीं रोकी गई. मैं समझता हूं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को स्वयं संसद में इसे लेकर बयान देना चाहिए. इसके साथ ही कश्मीर में क्यों अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है इसके कारणों को भी उन्हें बताना चाहिए.’

कांग्रेस नेता ने इसके साथ ही कश्मीर में सुरक्षा बलों की तैनाती की वजह से भी स्थानीय लोगों में डर बढ़ने की बात भी कही है. साथ ही जम्मू-कश्मीर से धारा 35ए और 370 को खत्म करने को उन्होंने ‘राजनीति से प्रेरित’ भी बताया है.

इससे पहले इसी शुक्रवार को सेना और प्रदेश पुलिस ने एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी. उस कॉन्फ्रेंस में अमरनाथ यात्रा के मार्ग में एक लैंडमाइन और दूरबीन युक्त स्नाइपर राइफल के अलावा कुछ दूसरे हथियार बरामद किए जाने की बात कही गई थी. सेना ने उन हथियारों का ताल्लुक पाकिस्तान से बताया था. फिर उस प्रेस कॉन्फ्रेंस के कुछ देर बाद जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा स्थगित करने की घो​षणा कर दी थी. साथ ही यात्रा के श्रद्धालुओं और दूसरे पर्यटकों को भी कश्मीर छोड़ने की सलाह दी गई थी.