देश के सबसे प्रतिष्ठित शिक्षा संस्थानों में शुमार भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (आईआईटी) में पहली बार इस साल कोई सीट खाली नहीं छूटी है. शनिवार को मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. मंत्रालय के उच्च शिक्षा सचिव आर सुब्रमण्यम ने बताया है, ‘आईआईटी संस्थानों में अंडर ग्रैजुएट कोर्सों की कुल 13,604 सीटें हैं और इस बार इनमें से एक भी सीट खाली नहीं छूटी. यह पहली बार हुआ है और इसकी वजह यह रही कि सभी आईआईटी संस्थानों ने इस दिशा में एक दूसरे के साथ सहयोग किया.’

देश में इस समय कुल 23 आईआईटी हैं. इनमें पिछले साल 118 सीटें खाली रह गई थीं. पीटीआई के मुताबिक तब मानव संसाधन और विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इन सीटों के खाली रह जाने की वजह बताते हुए कहा था कि छात्रों ने इन विषयों में दिलचस्पी नहीं दिखाई.

मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक 2013 में आईआईटी की 11 हजार में से 274 सीटें खाली रह गई थीं और इनकी सबसे ज्यादा संख्या आईआईटी-बीएचयू में थी. वहीं इंडियन स्कूल ऑफ माइन्स, जिसे 2016 में आईआईटी का दर्जा दिया गया था, में 2016 और 2017 में सबसे ज्यादा 23 सीटें नहीं भर पाई थीं. हालांकि इस बीच 2013 से 2017 तक आईआईटी कानपुर और हैदराबाद में कोई सीट खाली नहीं रही. आईआईटी दिल्ली में भी 2013 से 2015 तक सभी सीटें भरती रहीं लेकिन यहां 2016 और 2017 में दो-दो सीटें खाली रह गई थीं. इसी तरह इन दोनों सालों में दो-दो सीटें आईआईटी मुंबई में भी भरने से छूट गई थीं.

आईआईटी में खाली सीटों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंत्रालय ने 2017 में एक पैनल गठित किया था. इस पैनल ने सिफारिश की थी कि संस्थानों को अपने यहां उपलब्ध कोर्सों में सीटों की संख्या रोजगार के अवसरों, भविष्य की जरूरतों और संस्थान में बुनियादी ढांचे की स्थिति आदि को देखकर तय करनी चाहिए. इसके अलावा एक सिफारिश यह भी थी कि छात्रों की काउंसलिंग की प्रक्रिया के राउंड बढ़ाए जाएं और उनके लिए हेल्पलाइन शुरू की जाए.