कश्मीर घाटी में हालात खराब होना कोई नई बात नहीं है. लेकिन सरकार का हालात खराब होने के मद्देनजर असाधारण तैयारी करते दिखना और आम लोगों में इस बात को लेकर अफरा-तफरी का माहौल फैलना बिलकुल नया है.

घाटी में पिछले करीब डेढ़ हफ़्ते से एक के बाद एक सरकारी आदेश सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल रहे हैं और लोग अपने अपने हिसाब से अनुमान लगा रहे हैं कि क्या होने वाला है. हालात ये हैं कि न पुलिस, न राजनेता, न प्रशासन और न ही आम लोगों में किसी को कोई अंदाज़ा है कि क्या होने वाला है. जाहिर है ऐसे में सिर्फ अनुमान ही लग सकते हैं.

सत्याग्रह ने पिछले कई दिनों में दर्जनों लोगों से इस बारे में बात करके यह समझने की कोशिश की है कि आखिर होगा क्या. लेकिन इससे पहले कि इस बात पर चर्चा हो कि क्या होगा, यह समझना ज़रूरी है कि अभी तक क्या हुआ है.

अफरा-तफरी

बीती 24 जुलाई को गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने राज्य सभा को बताया था कि घाटी में सुरक्षा स्थिति बेहतर हुई है. उनका कहना था, ‘घुसपैठ 43 प्रतिशत से कम हुई है और स्थानीय युवाओं का मिलिटेंसी जॉइन करना 40 प्रतिशत से कम हुआ है. मिलिटेंट हमले 28 प्रतिशत कम हो गए हैं. सुरक्षा बलों की कारवाई 59 प्रतिशत से बढ़ी है और मिलिटेंट मारे जाने की घटनाओं में 22 प्रतिशत की बढ़त हुई है.’

ऐसे में सब अंदाजा लगा रहे थे कि कश्मीर में शायद अब लोग राहत की सांस लेंगे. लेकिन हुआ उल्टा है. पहला अचरज लोगों को जी किशन रेड्डी के बयान के सिर्फ एक दिन बाद तब हुआ जब एक सरकारी आदेश, जिसमें 10 हजार सुरक्षा बलों को कश्मीर लाने की बात कही गई थी, सोशल मीडिया पर वायरल हुआ. इसके बाद से अब तक इन सुरक्षा बलों की संख्या बढ़ कर 38 हज़ार हो गई है. ये सुरक्षा बल पहले से ही यहां तैनात 85 बटालियनों - जिनको अमरनाथ यात्रा के लिए यहां बुलाया गया था - के अतिरिक्त हैं.

सुरक्षा बलों के बढ़ाए जाने के बाद एक के बाद एक सरकारी आदेश सामने आते गए. इनमें सबसे प्रमुख है अमरनाथ यात्रा बंद होना, पर्यटकों को वापिस भेज देना, कॉलेज बंद कर देना और बाहरी छात्रों को लौटने के लिए कहना.

ऐसे में लोग घबरा गए हैं. पेट्रोल पंपों पर गाड़ियों की भरमार है और लोग खाने-पीने की चीज़ें भारी मात्रा में खरीदकर अपने घरों को ले जा रहे हैं. यह बात कि किसी को कोई अंदाज़ा नहीं है कि क्या होने वाला है, लोगों को और परेशान किए जा रही है.

अनुच्छेद 35-ए हटेगा?

सबसे ज़्यादा संभावित घटना अनुच्छेद 35-ए का हटाया जाना लग रही है. अनुच्छेद 35-ए और 370 जम्मू कश्मीर को भारत के संविधान में एक विशेष स्थिति प्रदान करते हैं. इसमें जम्मू कश्मीर का अलग संविधान और झंडा होने सहित बहुत से अन्य अधिकार शामिल हैं. इनमें सबसे प्रमुख अधिकार यह है कि जम्मू-कश्मीर के निवासियों के अलावा यहां भारत का और कोई नागरिक अपने नाम पर ज़मीन नहीं खरीद सकता.

भाजपा का इस मुद्दे को लेकर रुख हमेशा यह रहा है कि ये दोनों अनुछेद हटा दिये जाने चाहिए. यह बात उसके चुनाव घोषणापत्र का भी हमेशा से हिस्सा रही है. 2019 के चुनाव से पहले, अब गृह मंत्री बन गए, अमित शाह के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी ये दोनों अनुच्छेद हटाने की बात की थी. अमित शाह ने तो यहां तक कह दिया था कि वे अनुच्छेद 35-ए साल 2020 तक हटा देंगे.

तो क्या 35-ए को हटाया जा सकता है? श्रीनगर में स्थित एक वरिष्ठ पत्रकार नाम न छापने की शर्त पर कहते हैं, ‘संकेत तो ऐसे ही हैं. और जिस हिसाब से पुलिस चौकियों में सुरक्षा बल तैनात करने की बातें हो रही हैं, ऐसा लगता है कि इस बार सारे कश्मीरी लोग संभावित खतरा माने जा रहे हैं, चाहे वे पुलिस वाले ही क्यों हों.’

इस समय इस पत्रकार की ही तरह कोई भी पदाधिकारी, पुलिस अफसर या राजनेता अपना नाम प्रकाशित करने की इजाज़त नहीं दे रहा है. इस पत्रकार के मुताबिक सारे कश्मीरी लोगों को एक ही तराज़ू में तोलना इस बात का संकेत है कि बात शायद यहां जम्मू कश्मीर की विशेष स्थिति की ही है. जम्मू में भी कई जगह रैपिड एक्शन फोर्स तैनात की गई है, जो इसका एक और संकेत माना जा रहा है.

हालांकि जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ऐसा नहीं मानते. हाल में एक बयान में उनका कहना था, ‘ऐसी कौन सी स्थिति है जिसमें कश्मीर में आर्मी और एयरफोर्स को अलर्ट पर रखने की ज़रूरत पड़ सकती है. ये आर्टिकल 35-ए के बारे में नहीं है. ऐसा कोई अलर्ट, अगर वाकई में इशू किया गया है, तो ये किसी दूसरी चीज़ की तरफ इशारा करता है.’

वहीं राज्य की दूसरी पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ़्ती का इशारा भी 35-ए के हटाये जाने की तरफ है. एक बयान में उनका कहना था, ‘आप एक ऐसे मुस्लिम बहुसंख्यक राज्य का प्यार जीतने में नाकाम रहे हैं जिसने धर्म के नाम पर बंटवारा स्वीकार न करते हुए एक धर्मनिरपेक्ष भारत चुना था. लेकिन आज वही भारत शायद इस बात की तैयारी कर रहा है कि कश्मीरी लोगों से उनकी बची-खुची विशिष्ट पहचान छीन ली जाए.’

अब महबूबा सही हैं या उमर यह तो वक़्त ही बताएगा, लेकिन 35-ए या 370 हटाया जाना ही चर्चा में नहीं है. और चीज़ें भी हैं.

जम्मू-कश्मीर का बंटवारा

35-ए और 370 के बाद यह संभावना लोगों के बीच सबसे ज़्यादा चर्चा में है और एक तरीके से यह 35-ए और 370 के हटाये जाने से जुड़ी हुई भी है. इस बात पर चर्चा एक बड़े अंग्रेजी अखबार की एक खबर के चलते शुरू हुई थी और अभी तक चल रही है. संभावना जताई जा रही है कि जम्मू-कश्मीर को तीन हिस्सों में बांट दिया जाएगा. जम्मू को एक अलग राज्य बनाकर कश्मीर और लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बना दिया जाएगा.

दक्षिण कश्मीर के अनंतनाग स्थित एक राजनेता कहते हैं, ‘ऐसा इसलिए भी मुमकिन लगता है क्योंकि इससे 35-ए और 370 भी हट जाएंगे और कश्मीर घाटी हमेशा केंद्र के नियंत्रण में रहेगी.’

लेकिन सुरक्षा बलों का इतनी संख्या में यहां आना, अमरनाथ यात्रा का स्थगित हो जाना और स्कूल-कॉलेज बंद कर देना बहुत ज़्यादा कड़े कदम हैं और कुछ विशेषज्ञों की मानें तो चीज़ें मेल नहीं खा रही हैं. उनके मुताबिक जो भी होने वाला है वह शायद इस सब से बड़ा है.

श्रीनगर में राजनीति विज्ञान के एक अध्यापक सत्याग्रह से बातचीत में कहते हैं, ‘क्योंकि अगर बात लोगों के प्रदर्शनों की है तो उसके लिए पुलिस और सीआरपीएफ़ काफी है. फिर सेना भी यहां कम नहीं है. दूसरा ये कि अमरनाथ यात्रा 2016 के व्यापक विरोध प्रदर्शनों में भी नहीं रुकी थी.’

तो क्या तैयारियां युद्ध की हो रही हैं?

दो अगस्त को एक बड़े अंग्रेजी अखबार ने अपनी वेबसाइट पर खबर चलायी कि भारत की सेना ने नियंत्रण रेखा के पार जाकर पाकिस्तान वाले कश्मीर में दो कार्रवाईयां कीं और दर्जनों आतंकवादियों को मार गिराया. इस अखबार ने बाद में यह खबर हटा दी थी और इस बात पर कोई और चर्चा बिलकुल नहीं हुई.

उधर, कश्मीर घाटी में प्रशासन जगह-जगह मेडिकल इमरजेंसी रूम बना रहा है. पुलिस ने अपने ड्रग डी-एडिक्शन केंद्र इस सेवा के लिए खाली कर दिये हैं और वहां ये इमरजेंसी रूम बनाए गए हैं.

प्रशासन के एक सूत्र ने सत्याग्रह को बताया, ‘ये इमरजेंसी रूम इस बात का जायज़ा लेने के बाद बनाए गए हैं कि स्थानीय अस्पताल एक समय में कितने ज़ख़्मियों का इलाज कर सकते हैं. इसकी पूरी रिपोर्ट करीब 15 दिन पहले ही ले ली गयी थी.’

उधर जगह-जगह सेना को रखने की तैयारियां हो रही हैं. श्रीनगर के कश्मीर पॉलिटेक्निक कॉलेज के छात्रों को कॉलेज प्रशासन ने घर जाने को कहा है. सूत्र ये बताते हैं कि वहां भी सुरक्षा बल रखे जाएंगे.

पुलिस के एक सूत्र बताते हैं, ‘इसके अलावा सरकार स्थानीय मैरिज हाल्स में भी सुरक्षा बल रखने के प्रस्ताव पर गौर कर रही है. ऐसा किसी आम सूरत में नहीं होता है. अभी तक कश्मीर में काफी भारी प्रदर्शन हुए हैं और हमने सब आसानी से संभाल लिया था. यह कुछ और ही है.’

विधानसभा चुनाव की तैयारी?

वहीं कुछ लोगों का यह भी मानना है कि यह तैयारी विधानसभा चुनाव के लिए हो रही है.

जम्मू-कश्मीर में पिछले साल जून से राष्ट्रपति शासन लागू है और यहां की राजनीतिक पार्टियां बार-बार चुनाव कराए जाने पर ज़ोर दे रही हैं. कई खबरों से यह पता चला था कि कश्मीर में अमरनाथ यात्रा के बाद हालात का जायज़ा लिया जाएगा और फिर विधानसभा चुनाव कराये जाएंगे. इसलिए यह संभावना भी जताई जा रही है कि शायद यह सब सुरक्षा के इंतजाम चुनाव के लिए हों.

लेकिन जानकार लोग इस बात को नकार रहे हैं. एक पुलिस अधिकारी ने सत्याग्रह को बताया, ‘यहां पंचायत के चुनाव और फिर लोक सभा चुनाव बहुत आसानी से हो गए थे. मुझे नहीं लगता है चुनाव के लिए इतने कड़े इंतजाम किए जाएंगे.’

उधर, सरकार की मानें तो ज़मीन पर इतना कुछ होने के बावजूद कुछ नहीं होने वाला है: तीन अगस्त को उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में उनकी पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल सत्यपाल मलिक से मिला. उमर अब्दुल्ला के मुताबिक उनको आश्वासन दिया गया कि अनुछेद 35-ए और 370 से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी.

इस मुलाकात के बाद पूर्व मुख्यमंत्री का कहना था, ‘राज्यपाल ने हमें आश्वासन दिया है कि अनुछेद 35-ए और 370 से कोई छेड़छाड़ नहीं की जाएगी. लेकिन राज्यपाल इस मुद्दे पर अधिकार नहीं रखते हैं, भारत सरकार ज़रूर रखती है. हम चाहते हैं कि भारत सरकार संसद में यह बात कहे.’

उधर, राज्य के पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने भी कल एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इसमें उन्होंने बाकी सारी चर्चाओं को नकारते हुए कहा कि उन्हें मिलिटेंट्स की तरफ से हिंसा बढ़ाए जाने की खबरें मिल रही हैं. उनका कहना था, ‘तो कोशिश यही है कि ज़मीन पर सुरक्षा इंतजाम कड़े किए जाएं. हमें कहा गया है कि सुरक्षा बलों को आराम करने का वक़्त भी मिलना चाहिए तो बदली भी की जा रही है.’

फिलहाल खबर यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी कैबिनेट के साथ एक अहम बैठक कर रहे हैं. इससे पहले रविवार को गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और खुफिया सेवाओं के साथ एक अहम बैठक की. उधर, भारतीय सेना ने जम्मू-कश्मीर के केरन सेक्टर में घुसपैठ की कोशिश को नाकाम करते हुए पाकिस्तान बॉर्डर एक्शन टीम यानी बीएटी के सात जवानों को मार गिराया है. इनमें चार के शव भारतीय सीमा में पड़े हुए हैं और भारतीय सेना ने पाकिस्तान से कहा है कि वह इन शवों को वापस ले जाए. बीते काफी दिन से सीमा पर दोनों तरफ से भारी गोलाबारी की खबरें भी आ रही हैं.

इस सबके बीच फिलहाल कश्मीर में अफरा-तफरी का आलम है. लोग हलकान हुए जा रहे हैं.