जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 यानी जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने वाला विधेयक राज्यसभा में पारित हो गया है. इसके पक्ष में 125 जबकि विरोध में 61 वोट पड़े. हालांकि राज्यसभा में इस विधेयक को पारित करवाना सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के लिए आसान नहीं था क्योंकि 242 सदस्यों वाले संसद के उच्च सदन में एनडीए के सदस्यों की संख्या महज 107 है, जो बहुमत के लिए जरूरी 121 के आंकड़े से काफी कम है. लेकिन इस प्रस्ताव का कई अन्य दलों ने समर्थन किया. इसके अलावा सबसे बड़े विपक्षी दल कांग्रेस और इसके साथ तृणमूल कांग्रेस ने सदन से वॉकआउट किया जिसके चलते सरकार के लिए इस विधेयक को पारित करवाने की राह आसान हो गई.

इस विधेयक का समर्थन करने वाले दलों में मायावती की अगुवाई वाली बसपा, नवीन पटनायक की बीजेडी, जगन मोहन रेड्डी की वाईएसआर कांग्रेस, चंद्रबाबू नायडू की तेलुगू देशम पार्टी शामिल रही. इसके अलावा चौंकाने वाला फैसला करते हुए आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने भी इस विधेयक का समर्थन किया. जबकि एनडीए के ही घटक और नीतीश कुमार की अगुवाई वाले जनता दल यूनाइटेड ने इस विधेयक पर वोटिंग का बहिष्कार किया.

इससे पहले सोमवार को ही गृहमंत्री अमित शाह ने धारा 370 के पहले खंड को छोड़कर इसके दूसरे प्रस्तावों को हटाने और जम्मू एवं कश्मीर राज्य पुनर्गठन विधेयक 2019 को सदन में प्रस्तावित किया था. राज्य पुनर्गठन विधेयक में इस राज्य को जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के तौर दो केंद्र शासित प्रदेशों के तौर पर बांटने की बात कही गई थी. साथ ही यह भी कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के साथ उपराज्यपाल की व्यवस्था होगी जबकि लद्दाख में उपराज्यपाल के जरिये ही केंद्र का सीधा शासन होगा.