भारतीय विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा के दूसरे संस्थानों में अमूमन तीन साल की ग्रेजुएशन और दो साल की पोस्ट ग्रेजुएशन डिग्री होती है. इसी के बाद किसी छात्र या छात्रा को पीएचडी में प्रवेश मिल सकता है. लेकिन इस समय विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) सभी विषयों में चार साल के ग्रेजुएट कोर्स से जुड़ी एक सिफारिश पर विचार कर रहा है. ये ग्रेजुएट अपने कोर्स के बाद सीधे पीएचडी कर सकेंगे. इस सिफारिश में यह भी कहा गया है कि पीएचडी की डिग्री पाने के लिए शोधार्थी को किसी जर्नल में शोधपत्र (रिसर्च पेपर) प्रकाशित करवाना अनिवार्य नहीं होना चाहिए.

द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के मुताबिक यूजीसी से यह सिफारिश भारतीय विज्ञान संस्थान (आईएससी), बैंगलोर के पूर्व निदेशक पी बलराम की अगुवाई वाली एक विशेषज्ञ समिति ने की है. यूजीसी के उपाध्यक्ष भूषण पटवर्धन के मुताबिक इस समिति ने शोधकार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए ये सिफारिशें की हैं.

यूजीसी द्वारा 2016 में जारी किए दिशा-निर्देशों के मुताबिक हर पीएचडी छात्र-छात्रा के लिए यह अनिवार्य किया गया था कि उसका कम से कम एक शोधपत्र किसी संबंधित जर्नल में प्रकाशित हो. पटवर्धन का कहना है कि ताजा सिफारिशों के मुताबिक इस दिशा-निर्देश की समीक्षा की जा रही है.

इन सिफारिशों के हिसाब से अब पीएचडी के परीक्षकों को ज्यादा जवाबदेह बनाया जा सकता है और उनका नाम शोधपत्र पर दर्ज किया जा सकता है. अब तक ऐसा कोई नियम नहीं था. बलराम द टेलीग्राफ से बातचीत में कहते हैं कि विकसित देशों में अमूमन चार साल के ही ग्रेजुएट कोर्स होते हैं और इस तरह पीएचडी करने वाले छात्र-छात्राओं का एक साल बेकार होने से बच जाता है.

भारत में इस समय जो भी चार साल के ग्रेजुएट कोर्स हैं, जैसे कि बीटेक (बैचलर ऑफ टेक्नॉलॉजी) या बीई (बैचलर ऑफ इंजीनियरिंग), उनके बाद छात्र सीधे पीएचडी में प्रवेश ले सकते हैं. अपनी अगुवाई में बनी समिति की सिफारिशों के हवाले से बलराम का यह भी कहना है, ‘ग्रेजुएट कोर्स के चौथे साल के पाठ्यक्रम में शोध को केंद्र में रखा जा सकता है. वहीं इस दौरान विश्वविद्यालयों को तीन वर्षीय परंपरागत ग्रेजुएट कोर्स चलाने की छूट भी मिलेगी.’ इसके अलावा अगर कोई छात्र चार साल का ग्रेजुएट कोर्स करने के बाद पीएचडी के बजाय पोस्ट ग्रेजुएशन करना चाहता है तो उसे ऐसा करने की छूट मिलेगी.

दिल्ली विश्वविद्यालय में 2013 में चार वर्षीय ग्रेजुएट कोर्स शुरू किए गए थे लेकिन 2014 में केंद्र में भाजपा की अगुवाई वाली सरकार बनने के बाद यह व्यवस्था रद्द कर दी गई थी.