पूर्व विदेश मंत्री और भाजपा की वरिष्ठ नेता सुषमा स्वराज का निधन हो गया है. न्यूज एजेंसी एएनआई ने एक ट्वीट करके इस खबर की पुष्टि की है. मंगलवार की रात को उन्हें हार्ट अटैक आया था और इंडिया टुडे के मुताबिक इसके बाद करीब सवा दस बजे उन्हें दिल्ली स्थित ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (एम्स) में भर्ती कराया गया था. इस दौरान केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, हर्षवर्धन और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता उनका हालचाल लेने एम्स पहुंचे थे.

यह अजब संयोग है कि तबीयत खराब होने से कुछ ही देर पहले सुषमा स्वराज ने एक ट्वीट करके कश्मीर से जुड़े फैसलों को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार जताया था और लिखा था, ‘प्रधानमंत्री जी - आपका हार्दिक अभिनन्दन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी.’ इस ट्वीट से कुछ देर पहले ही लोकसभा से भी जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पारित हुआ था. जबकि इससे पहले सोमवार को राज्यसभा से यह विधेयक पारित हो चुका है.

67 वर्षीय सुषमा स्वराज मोदी सरकार के पहले कार्यकाल में विदेश मंत्री थीं. पिछली लोकसभा में वे भाजपा की टिकट पर मध्य प्रदेश की विदिशा संसदीय सीट से चुनी गई थीं. हालांकि इस बार उन्होंने खराब स्वास्थ्य की वजह से चुनाव न लड़ने का फैसला किया था. 2016 में उनका किडनी ट्रांसप्लांट हुआ था.

सुषमा स्वराज के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित कई दिग्गज नेताओं ने शोक जताया है. प्रधानमंत्री मोदी ने उन्हें असाधारण नेता बताते हुए अपने ट्वीट में लिखा है, ‘भारतीय राजनीति का एक गौरवशाली अध्याय खत्म हो गया है. भारत एक ऐसे असाधारण नेता के निधन से शोक में है जिसने अपनी जिंदगी जनसेवा और गरीबों का जीवन बेहतर बनाने के लिए समर्पित कर दी थी. सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की अकेली व्यक्ति थीं और वे करोड़ों लोगों की प्रेरणा स्रोत थीं.’

इसके अलावा कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने भी एक ट्वीट में पूर्व विदेश मंत्री को असाधारण नेता बताया है और लिखा है, ‘सुषमा स्वराज जी के निधन की खबर सुनकर मुझे झटका लगा है. वे एक असाधारण नेता, स्वभाविक वक्ता और एक विरली सांसद थी, जिनके तमाम पार्टियों के नेताओं से मित्रवत संबंध थे. इस दुख की घड़ी में मेरी संवेदनाएं उनके परिवार के साथ हैं.’

मोदी सरकार में विदेश मंत्री बनने से पहले सुषमा स्वराज अटल बिहारी वाजपेयी की अगुवाई वाली केंद्र सरकार में भी कैबिनेट मंत्री रह चुकी थीं. वहीं 1998 में वे दो महीने के लिए दिल्ली की मुख्यमंत्री भी बनी थीं.