मोदी सरकार दूरसंचार कंपनी बीएसएनएल की भू परिसंपत्तियों और कर्ज को एक विशेष इकाई (एसपीवी) को स्थानांतरित करने का विचार कर रही है. सरकार का मानना है कि ऐसा करके सार्वजनिक क्षेत्र की इस कंपनी को कर्ज मुक्त बनाया जा सकता है. खबरों के मुताबिक एसपीवी बीएसएनएल की जमीनों को बेचेगी और बीएसएनएल का करीब 15,000 करोड़ रुपये का कर्ज चुकाएगी.

लेकिन सरकार के इस फैसले पर भारत संचार निगम लि (बीएसएनएल) की कर्मचारी यूनियन ने आपत्ति जताई है. यूनियन ने दूरसंचार सचिव को लिखे पत्र में कहा है कि कंपनी की कई जमीनों को मौद्रिकरण के नाम पर औने-पौने दाम पर एसपीवी को स्थानांतरित किया जा रहा है.

पीटीआई के मुताबिक कर्मचारी यूनियन का आरोप है कि सरकार कंपनी की कई जमीनों को काफी कम मूल्य यानी 20,210 करोड़ रुपये में ही एसपीवी को देना चाहती. जबकि, इन जमीनों की कीमत कहीं ज्यादा है क्योंकि ये देश के प्रमुख शहरों में स्थित हैं.

हालांकि, बीएसएनएल प्रबंधन ने कर्मचारी यूनियन के इन आरोपों को खारिज किया है. प्रबंधन का कहना है कि जमीनों का मूल्यांकन अभी सांकेतिक ही है और जमीन के टुकड़ों को बेचने से पहले उनका अंतिम मूल्यांकन किया जाएगा.

इस बारे में बीएसएनएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक पीके पुरवार ने पीटीआई से कहा, ‘इस तरह के आरोप गलत हैं. यह मूल्यांकन सांकेतिक आधार पर तैयार किया गया है. इसका अंतिम मूल्यांकन सरकार के पास पंजीकृत नीतियों द्वारा किया जाएगा.’ उन्होंने जानकारी देते हुए यह भी बताया कि जिस एसपीवी का प्रस्ताव किया गया है उसका शत प्रतिशत स्वामित्व सरकार के पास ही होगा.

हालांकि, इस पर कर्मचारी यूनियन का कहना है कि उसने चेन्नई और केरल सर्किल में जमीन के टुकड़ों की जानकारी जुटाई है. इसमें यह सामने आया है कि इन जमीनों का मूल्य काफी कम लगाया गया है.