2019 के लोकसभा चुनावों से ठीक पहले मुलायम सिंह यादव ने सबको चौंका दिया था. ऐसा तब हुआ था जब समाजवादी पार्टी (सपा) के संस्थापक ने लोकसभा में खुले तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की थी और उन्हें दोबारा सत्ता में आने की शुभकामना दी थी. मुलायम सिंह ने कहा था कि उनकी दिल से इच्छा है कि नरेंद्र मोदी एक बार फिर से प्रधानमंत्री बनें. उनकी इस बात से हैरान होने वालों में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेता भी शामिल थे. मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र मोदी की तारीफ एक ऐसे वक्त में की थी जब उनकी पार्टी सपा, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और राष्ट्रीय लोक दल (आरएलडी) गठबंधन बनाकर देश के सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश में भाजपा का रथ में रोकने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए थे.

इसके बावजूद जब मुलायम सिंह यादव ने नरेंद्र मोदी का समर्थन किया तो कुछ राजनीतिक जानकारों ने माना कि वे उत्तर प्रदेश की सियासत हकीकत को समझकर ऐसा कर रहे हैं. और इसी वजह से उन्होंने नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए उन्हें अपने अनुकूल रखने की कोशिश की है. जब लोकसभा चुनावों के नतीजे आए तो पता चला कि मुलायम सिंह यादव का सियासी दांव सही साबित हुआ. महागठबंधन पूरी तरह से नाकाम हो गया और भाजपा की सीटों में कोई खास कमी नहीं आई.

लोकसभा चुनावों के बाद संसद के मॉनसून सत्र में मुलायम सिंह यादव भाजपा के और नजदीक आए. इस सत्र के दौरान कुछ मौके ऐसे आए जब उन्होंने अपनी पार्टी से अलग लाइन लेते हुए महत्वपूर्ण विधेयकों पर सत्ताधारी भाजपा का साथ दिया. सपा के लिए सबसे विचित्र स्थिति तो तब पैदा हुई जब गैरकानूनी गतिविधि रोकथाम संशोधन यानी यूएपीए विधेयक पर लोकसभा में मतदान होना था. गृह मंत्री अमित शाह इस विधेयक के प्रावधानों के बारे में अपनी बात रख रहे थे. इसी दौरान जब संयुक्त प्रगति​शील गठबंधन (यूपीए) की अध्यक्ष सोनिया गांधी ने वॉकआउट का निर्णय लिया तो सपा सांसद भी उनके साथ सदन से बाहर निकल गए. लेकिन मुलायम सिंह यादव सदन में अपने स्थान पर ही बैठे रहे. वे न सिर्फ बैठे रहे बल्कि जब मतदान की बारी आई तो उन्होंने भाजपा के पक्ष में मतदान किया.

लेकिन ऐसा पहली बार नहीं हुआ था कि मुलायम सिंह यादव ने अपनी पार्टी से अलग लाइन लेते हुए मॉनसून सत्र में भाजपा के साथ मतदान किया. यूएपीए विधेयक पर मतदान के वक्त मुलायम सिंह यादव के आस-पास रहे एक भाजपा सांसद बताते हैं, ‘इससे पहले भी दो विधेयकों पर नेताजी ने सरकार का साथ दिया था. जब यूएपीए विधेयक पर मुलायम सिंह यादव सदन में बैठे रहे तो वोटिंग के बाद गृह मंत्री अमित शाह ने उनके पास आकर उन्हें धन्यवाद दिया था.’

अमित शाह और मुलायम सिंह यादव के बीच हुई बातचीत के बारे में वहां मौजूद एक अन्य भाजपा सांसद बताते हैं, ‘जब अमित शाह मुलायम सिंह यादव को धन्यवाद कहने आए तो नेताजी ने उन्हें कहा कि अमित शाह जी ये मत समझिएगा कि मेरी उम्र अधिक है इसलिए मैं बगैर कुछ सोचे-समझे ही आपका साथ दे रहा हूं. मैं आपका समर्थन बहुत सोच-समझकर कर रहा हूं.’

इस बातचीत के बाद से भाजपा और सपा समेत दूसरी पार्टियों के नेताओं में भी मुलायम सिंह यादव और भारतीय जनता पार्टी के बीच बढ़ती नजदीकी को लेकर तरह-तरह की बातें चल रही हैं. इस बारे में भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘मुलायम सिंह यादव ने चुनावों से पहले संसद में जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ की, उसे भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने बेहद सकारात्मक ढंग से लिया है. इसके बाद से कई स्तरों पर मुलायम सिंह यादव और भाजपा की नजदीकी बढ़ रही है.’

भाजपा और सपा समेत दूसरी पार्टियों के नेताओं में मुलायम सिंह यादव और भाजपा के बीच बढ़ती नजदीकी को लेकर तरह-तरह की बातें चल भी रही हैं. इसकी एक बानगी के तौर पर यह कहा जा रहा है कि जून में जब यह सूचना आई कि मुलायम सिंह की तबीयत खराब है तो उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उनसे मिलने उनके घर गए. इसके जरिए भाजपा ने शायद यह संकेत देने की कोशिश की कि अगर वे उसके शीर्ष नेतृत्व की तारीफ कर रहे हैं तो पार्टी भी उनके मान-सम्मान का पूरा ध्यान रखेगी.

लेकिन अपनी सियासत के आखिरी दौर में खड़े मुलायम सिंह यादव केवल मान-सम्मान पाने के लिए इस कदर भाजपा के साथ खड़े होंगे ऐसा सोच पाना जरा मुश्किल है. ऐसे में थोड़ा सा अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि लोकसभा चुनाव के आखिरी चरण और चुनाव परिणाम आने के बीच में सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के एक मामले में उन्हें और अखिलेश यादव को क्लीन चिट दे दी. लेकिन अभी भी वे और अखिलेश यादव सीबीआई के शिकंजे से पूरी तरह से निकले नहीं हैं. इसके उदाहरण के तौर पर गायत्री प्रजापति मामले का नाम लिया जा सकता है. ऐसे में राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि मुलायम सिंह यादव भाजपा का साथ देकर गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को अपने प्रति नरम रखने की कोशिश कर रहे हैं.

‘जिस तरह से सपा के राज्यसभा सांसद इस्तीफा देकर भाजपा की ओर रुख कर रहे हैं, उस हालत में अपने पुराने दिनों वाले मुलायम सिंह यादव बेहद आक्रामक रहते और भाजपा के लिए मुश्किलें खड़ी करने की कोशिश करते. लेकिन आज उन्हें यह मालूम है कि कई मामले ऐसे हैं जिनमें न सिर्फ उनकी गर्दन फंस सकती है बल्कि अखिलेश यादव का राजनीतिक करियर भी निपट सकता है. इसलिए आज अगर मुलायम सिंह यादव भाजपा का साथ दे रहे हैं तो वह न सिर्फ उनके अपने हित-अहित से जुड़ा हुआ है बल्कि उनके बेटे अखिलेश यादव और उनके साथ-साथ सपा के भविष्य से भी जुड़ा हुआ है’ इस मामले में जानकारी रखने वाले भाजपा के एक नेता कहते हैं, ‘उन्हें लगता है कि अगर वे भाजपा का साथ देते रहेंगे तो सरकार कम से कम उनके परिवार के प्रति कार्रवाई करते वक्त नरम रह सकती है.’