जम्मू-कश्मीर में कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच ईद मनाई गई, अजीत डोभाल एक बार फिर हालात का जायजा लेने पहुंचे

देश भर के साथ आज जम्मू-कश्मीर में भी ईद-उल-अजहा का त्योहार मनाया गया. राज्य में कड़े सुरक्षा प्रतिबंध अब भी जारी हैं. श्रीनगर की अधिकांश बड़ी मस्जिदों में ईद की नमाज़ की अनुमति नहीं दी गई. ज्यादातर इलाकों में ये छोटी-छोटी मस्जिदों में अदा की गई. जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक ट्वीट कर कहा कि ईद की नमाज़ शांतिपूर्ण रही. केंद्र सरकार द्वारा जम्मू कश्मीर का विशेष दर्जा खत्म करने और उसे दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने के फैसले के बाद से ही राज्य में हालात तनावपूर्ण हैं. ईद की नमाज के बाद भी लोगों से अपने घरों में लौटने के लिए कहा गया. साथ ही दुकानदारों से भी दुकानों को बंद करने की अपील की गई. कश्मीर घाटी में हजारों सुरक्षाकर्मी तैनात हैं. फोन और इंटरनेट सेवाएं अभी भी बहाल नहीं की गई हैं.

उधर, घाटी में तनाव के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने श्रीनगर और पुलवामा सहित तमाम इलाकों का दौरा किया. इसका मकसद सुरक्षा हालात की समीक्षा करना था. बीते हफ्ते भी अजीत डोभाल कश्मीर घाटी पहुंचे थे. इस दौरान उन्होंने अनुच्छेद 370 को लेकर केंद्र सरकार के फैसले पर स्थानीय लोगों को आश्वस्त करने की कोशिश की थी.

भारत-चीन के बीच कश्मीर सहित तमाम मुद्दों पर बात, एस जयशंकर ने कहा- मतभेदों को विवाद नहीं बनने देंगे

जम्मू-कश्मीर पर केंद्र के फैसले की दुनिया भर में चर्चा के बीच विदेश मंत्री एस जयशंकर चीन पहुंचे हैं. विदेश मंत्री का पद संभालने के बाद उनकी ये पहली चीन यात्रा है. इस दौरान उन्होंने चीनी विदेश मंत्री वांग ली से मुलाकात की. दोनों देशों के बीच कश्मीर सहित कई मुद्दों पर बात हुई. मुलाकात के बाद एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन के बीच कई मुद्दों को लेकर मतभेद हैं, लेकिन वो इन मतभेदों को विवाद नहीं बनने देंगे. उधर, चीन के विदेश मंत्री वांग ली ने जम्मू-कश्मीर के मसले पर कहा कि भारत ने जो फैसला लिया है, उसपर अभी ये जरूरी है कि इलाके में शांति बनी रहे. एस जयशंकर का चीन दौरा उस वक्त हुआ है, जब पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर के मसले पर दुनियाभर से मदद मांग रहा है. पाकिस्तानी विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी भी इस सिलसिले में चीन पहुंचे थे.

केरल में बाढ़ से मरने वालों का आंकड़ा 76 तक पहुंचा, करीब तीन लाख लोग राहत शिविरों में

केरल में भारी बारिश के चलते हुए हादसों में मरने वालों की संख्या बढ़कर 76 हो गयी है. करीब तीन लाख लोग राहत शिविरों में शरण लिये हुए हैं. हालांकि राहत की बात ये है कि पानी अब घटने लगा है. केरल के मलप्पुरम तथा वायनाड के भूस्खलन प्रभावित इलाकों में बचाव अभियान अब भी जारी है. अभी तक जो 58 व्यक्ति लापता हैं उनमें से 50 मलप्पुरम से हैं. कांग्रेस नेता राहुल गांधी बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिये केरल में हैं. उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं से बाढ़ से प्रभावित लोगों को हरसंभव मदद मुहैया कराने की अपील की है. बारिश का असर परिवहन सेवाओं पर भी पड़ा है. रेलवे ने आज पांच ट्रेनें रद्द कर दीं. उधर, केरल विश्वविद्यालय ने भी 13 अगस्त को होने वाली सभी परीक्षाओं को रद्द कर दिया है.

रिलायंस में अब तक का सबसे बड़ा विदेशी निवेश

रिलायंस इंडस्ट्रीज अपने तेल और रसायन कारोबार में 20 फीसदी हिस्सेदारी सऊदी अरब की प्रमुख तेल कंपनी अरामको को बेचेगी. ये सौदा करीब 15 अरब डॉलर का होगा. सऊदी अरामको दुनिया की सबसे बड़ी कच्चा तेल निर्यातक कंपनी है. रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन मुकेश अंबानी ने सोमवार को ये जानकारी दी. उन्होंने कहा कि ये न केवल रिलायंस के इतिहास में सबसे बड़ा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश होगा बल्कि इसकी गिनती देश के सबसे बड़े विदेशी निवेश के सौदों में होगी. रिलायंस ने पेट्रोलियम ईंधन के अपने खुदरा कारोबार की 49 प्रतिशत हिस्सेदारी ब्रिटेन की कंपनी बीपी को बेचने की भी घोषणा की है. इस सौदे से कंपनी को 7,000 करोड़ रुपये मिलेंगे. इन दोनों सौदों से मिलने वाले पैसे से रिलायंस इंडस्ट्रीज को अपने ऊपर कर्ज का बोझ कम करने में मदद मिलेगी. कंपनी पर अभी करीब पौने तीन लाख करोड़ रुपये का कर्ज है.

सरकार विरोधी प्रदर्शनों के चलते हांगकांग अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सभी उड़ानें रद्द की गईं

हांगकांग में सरकार विरोधी प्रदर्शन एक नए स्तर पर जा पहुंचे हैं. आज इनके चलते वहां के अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट से सारी हवाई उड़ानें रद्द करनी पड़ीं. काले कपड़े पहने प्रदर्शनकारी बड़ी संख्या में चौथे दिन भी एयरपोर्ट के मुख्य टर्मिनल पर पहुंच गए. इस बीच चीनी विदेश मंत्रालय ने इन प्रदर्शनकारियों को चेतावनी दी है. एक बयान में उसने कहा है कि इन प्रदर्शनकारियों ने गंभीर अपराध किया है. चीनी विदेश मंत्रालय का ये भी कहना था कि ये आतंकवाद का संकेत है. हांगकांग में ये उथल-पुथल हाल में एक प्रत्यर्पण विधेयक के चलते शुरू हुई थी. इसमें हांगकांग से चीन प्रत्यर्पण को आसान बनाने का प्रावधान था. लेकिन भारी विरोध के बाद स्थानीय प्रशासन को कदम पीछे खींचने पड़े. लेकिन विरोध प्रदर्शन अब भी जारी है. प्रदर्शनकारी अब लोकतांत्रिक सुधारों की मांग कर रहे हैं.