दुष्कर्म के लंबित मामलों पर सुनवाई के लिए देशभर में 1,000 से ज्यादा फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन पर काम दो अक्टूबर से शुरू होने की संभावना है. कानून मंत्रालय ने यह जानकारी दी है. कानून मंत्रालय के न्याय विभाग ने 767.25 करोड़ रुपये की लागत से 1023 फास्ट ट्रैक अदालतों के गठन का प्रस्ताव दिया था. निर्भया कोष के तहत इस काम के लिए एक साल में 474 करोड़ रुपये की केंद्रीय सहायता दी जाएगी. साल 2012 के निर्भया कांड के बाद केंद्र ने महिलाओं की सुरक्षा पर केंद्रित सरकारी पहलों और एनजीओ के सहयोग पहुंचाने के लिए 2013 में इस कोष की घोषणा की थी.

पीटीआई के मुताबिक आठ अगस्त को कैबिनेट सचिवालय को भेजे एक पत्र में न्याय विभाग ने कहा है कि 11 जुलाई को व्यय वित्त समिति की सिफारिश और कानून मंत्री की सहमति मिलने के बाद इस मामले को मंजूरी के लिए वित्त मंत्रालय के पास भेज दिया गया है. इससे पहले महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के एक बयान में कहा गया था कि पहले चरण में नौ राज्यों में इस तरह की 777 अदालतें गठित की जा सकती हैं और दूसरे चरण में 246 अदालतों का गठन होगा.

संसद के हालिया सत्र में यौन अपराधों से बच्चों को संरक्षण (पॉक्सो) कानून में संशोधनों को मंजूरी भी दी गई थी.