अमेरिका एशिया में मिसाइलें तैनात करने पर गंभीरता से विचार कर रहा है. एक वरिष्ठ अमेरिकी राजनयिक ने मंगलवार को इसकी जानकारी देते हुए कहा कि वाशिंगटन एशिया में अपने सहयोगियों के साथ मध्यम दूरी की मिसाइलों की तैनाती को लेकर विचार-विमर्श कर रहा है.

पीटीआई के मुताबिक मंगलवार को एक कार्यक्रम के दौरान अमेरिकी राजनयिक एंड्रिया थॉमप्सन का कहना था, ‘अमेरिका की योजना है कि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में (मध्यम दूरी की बैलिस्टिक) मिसाइलें तैनात की जाएं. लेकिन जिन देशों में इनकी तैनाती की योजना है वहां की सरकारें ही इस पर अंतिम निर्णय लेंगी क्योंकि यह उनकी संप्रभुता का मामला है.’

अमेरिका ने बीते दो अगस्त को रूस के साथ 32 साल पहले हुई ‘मध्यम-दूरी परमाणु शक्ति संधि’ यानी आईएनएएफ संधि से हटने का आधिकारिक ऐलान किया था. यह संधि इन दोनों देशों को जमीन से मार करने वाली ऐसी मिसाइलें बनाने से रोकती है जो परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम हों और जिनकी मारक क्षमता 500 से लेकर 5,500 किलोमीटर तक हो. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि रूस कई सालों से इस संधि का उल्लंघन कर रहा था, इसलिए अब अमेरिका भी इस संधि की शर्तों को नहीं मानेगा.

अमेरिका के इस संधि से हटने के बाद, बीते हफ्ते अमेरिकी रक्षा मंत्री मार्क एस्पर ने भी कहा था कि अब अमेरिका एशिया में भी मध्यम दूरी की मिसाइलें तैनात करने की योजना बना रहा है. अमेरिकी विश्लेषकों की मानें तो वाशिंगटन का एशिया में ये मिसाइलें तैनात करने का मकसद चीन की बढ़ती ताकत का मुकाबला करना है.

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