सिक्किम में एसडीएफ के 10 विधायक भाजपा में शामिल हुए, पार्टी मुख्य विपक्षी दल बनी

सिक्किम के पूर्व मुख्यमंत्री पवन कुमार चामलिंग की अगुवाई वाले सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट यानी एसडीएफ के दस विधायक भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए हैं. इन विधायकों ने आज नई दिल्ली में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा की मौजूदगी में भाजपा की सदस्यता ली. एसडीएफ के पवन कुमार चामलिंग के नाम लगातार 25 साल तक मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड रहा है. लेकिन हाल में वहां लोकसभा चुनाव के साथ हुए विधानसभा चुनाव में उनकी पार्टी को 32 में से सिर्फ 15 सीटों पर ही जीत मिल पाई थी. इसकी वजह से उन्हें विपक्ष में बैठना पड़ा था. उधर, सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा के खाते विधानसभा की 17 सीटें आई थीं जिसके बाद प्रेम सिंह तमांग वहां के मुख्यमंत्री बने थे. ताजा घटनाक्रम के बाद सिक्किम में भाजपा विधायकों की संख्या शून्य से 10 हो गई है. पार्टी का कहना है कि अब वो सिक्किम में सकारात्मक विपक्ष की भूमिका निभाएगी.

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में लगी पाबंदियों को तुरंत हटाने से इनकार किया, कहा सरकार को हालात सामान्य करने के लिए वक्त देना होगा

सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर में फोन और इंटरनेट सहित कई सेवाओं पर लगी पाबंदी को हटाने को लेकर तत्काल कोई निर्देश देने से इंकार कर दिया है. शीर्ष अदालत ने कहा कि राज्य की स्थिति बहुत ही संवेदनशील है. सुप्रीम कोर्ट का ये भी कहना था कि सरकार को हालात सामान्य करने के लिये जरूरी समय दिया जाना चाहिए. कोर्ट कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला की याचिका पर सुनवाई कर रहा था. सुनवाई के दौरान केंद्र ने शीर्ष अदालत को बताया कि जम्मू-कश्मीर के हालात की रोजाना समीक्षा की जा रही है. अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने ये भी कहा कि हालात सामान्य होने में कुछ दिन का समय लगेगा. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में स्थिति सामान्य होने का इंतजार करेगा और मामले में दो हफ्ते बाद सुनवाई की जाएगी. धारा 370 खत्म किए जाने के बाद से जम्मू-कश्मीर में इंटरनेट और फोन सेवाओं पर रोक है. यातायात पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं. राज्य में सुरक्षा बलों की तादाद भी काफी बढ़ा दी गई है.

प्रियंका गांधी ने सोनभद्र हत्याकांड के पीड़ितों से मुलाकात की, भाजपा ने इसे राजनीतिक स्टंट बताया

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी आज उत्तर प्रदेश के सोनभद्र पहुंचीं. यहां उन्होंने बीते महीने हुए जमीन के एक विवाद में मारे गए 10 लोगों के परिवारों से मुलाकात की. प्रियंका गांधी ने कहा कि उन्होंने पीड़ितों के घर आकर उनसे मिलने का वादा किया था. उनका ये भी कहना था कि वे न्याय के लिए पीड़ित परिवारों के संघर्ष में उनके साथ हैं. उधर, भाजपा ने कांग्रेस महासचिव के इस दौरे को राजनीतिक स्टंट बताया है. पार्टी नेता और राज्य के उप मुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कहा कि सरकार ने इस मामले में कठोतरतम कार्रवाई की है. उनका ये भी कहना था कि जिस जमीन को लेकर 10 लोगों की जान गई उस पर कांग्रेस के शासनकाल में पार्टी के ही नेताओं ने अवैध तरीके से कब्जा किया था. दिनेश शर्मा ने कहा कि प्रियंका गांधी को पहले अपने नेताओं के कृत्यों के लिए पश्चाताप करना चाहिए.

ऑटोमोबाइल क्षेत्र का संकट जारी, घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में 31 फीसदी की गिरावट

देश में ऑटोमोबाइल क्षेत्र का संकट जारी है. जुलाई में भी घरेलू यात्री वाहनों की बिक्री में करीब 31 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई है. बिक्री में गिरावट का ये लगातार नौंवां महीना है. ऑटोमोबाइल सेक्टर देश की जीडीपी में कुल सात फीसदी का योगदान करता है. बताया जा रहा है कि इसमें जारी सुस्ती बीते अप्रैल से अब तक करीब साढ़े तीन लाख लोगों की नौकरी ले चुकी है. सुस्त मांग को देखते हुए लगभग सभी कंपनियों को उत्पादन में कटौती करनी पड़ी है. हालात के आगे और भी खराब होने के आसार जताए जा रहे हैं. इसे देखते हुए वाहन निर्माताओं ने सरकार से विशेष उपायों की अपील की है.

विश्व कप क्रिकेट के फाइनल में इंग्लैंड की जीत का कारण बने विवादास्पद ओवरथ्रो की समीक्षा होगी

क्रिकेट विश्व कप का फाइनल मैच सुर्खियों में लौट आया है. एमसीसी वर्ल्ड क्रिकेट कमेटी यानी डब्ल्यूसीसी इस मैच के आखिरी ओवर में हुए विवादित ओवरथ्रो की अगले महीने समीक्षा करेगी. इस ओवरथ्रो के चलते ये मैच सुपरओवर में गया था और इंग्लैंड विजेता बना था. ये घटना न्यूजीलैंड के गेंदबाज ट्रेंट बोल्ट के अंतिम ओवर की चौथी गेंद पर हुई थी. दूसरा रन पूरा करने की कोशिश में इंग्लैंड के बल्लेबाज बेन स्टोक्स ने छलांग लगाई थी. इसी दौरान डीप मिडविकेट से फेंकी गई गेंद उनके बल्ले से टकराकर थर्ड मैन बाउंड्री पर चार रन के लिए चली गई थी. भाग कर लिए दो रन और ओवरथ्रो की बाउंड्री से स्टोक्स को छह रन दिए गए. जबकि कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि पांच ही रन दिए जाने चाहिए थे. ऐसी स्थिति में इंग्लैंड को न्यूजीलैंड के खिलाफ एक रन से हार का सामना करना पड़ता. फील्ड अंपायर कुमार धर्मसेना ने भी बाद में माना था कि उनसे निर्णय लेने में चूक हुई थी.

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