दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में संत रविदास का एक मंदिर गिराए जाने के खिलाफ दलितों का विरोध प्रदर्शन बुधवार को हिंसक हो गया. पुलिस ने भीड़ को तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया. इस घटना में कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं. उधर, दलित संगठन भीम आर्मी ने दावा किया कि उनके नेता चंद्रशेखर आज़ाद को हिरासत में ले लिया गया है और पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर गोलियां भी चलायी हैं.

इस घटना से कुछ देर पहले रविदास मंदिर को गिराए जाने के विरोध में हजारों दलितों ने मध्य दिल्ली के झंडेवालान स्थित अम्बेडकर भवन से रामलीला मैदान तक मार्च निकाला था. बताया जाता है कि ये प्रदर्शनकारी देश के विभिन्न हिस्सों से दिल्ली पहुंचे थे.

सुप्रीम कोर्ट कह चुका है कि दिल्ली के तुगलकाबाद इलाके में संत रविदास मंदिर तोड़े जाने की घटना पर राजनीति नहीं होनी चाहिए. इसके बावजूद ऐसा तेजी से हो रहा है. कुछ दिन पहले बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने इसकी निंदा करते हुए सरकार से इसका पुनर्निर्माण करने को कहा. एक ट्वीट में उन्होंने कहा कि इस घटना से बहुजन समाज के संतों के प्रति हीन व जातिवादी मानसिकता साफ झलकती है.’ एक दूसरे ट्वीट में उन्होंने केंद्र और दिल्ली सरकार से कोई बीच का रास्ता निकालने और मंदिर का पुनर्निर्माण कराने की मांग की.

राष्ट्रीय राजधानी के तुगलकाबाद वनक्षेत्र स्थित संत रविदास मंदिर को हाल में ढहा दिया गया था. दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने इस पर सोमवार को जारी बयान में कहा था कि उच्चतम न्यायालय के आदेश पर ढांचे को हटा दिया गया. उसने अपने बयान में ‘मंदिर’ शब्द का इस्तेमाल नहीं किया. अब इस मुद्दे पर दिल्ली से लेकर पंजाब तक राजनीति गरमा गई है. आम आदमी पार्टी ने भी इसका विरोध किया है. पार्टी ने प्रधानमंत्री को एक चिट्ठी लिखकर मामले में दखल की मांग की है. एनडीए सहयोगी शिरोमणी अकाली दल ने भी मंदिर ढहाए जाने की आलोचना की है और केंद्र के तहत आने वाले डीडीए को इसका दोषी ठहराया है. पंजाब के कई इलाकों में दलित संगठनों ने बीते हफ्ते इस मुद्दे पर बंद का आह्वान किया.

मंदिर का इतिहास

एक वर्ग मानता है कि 15वीं सदी में हुए संत रविदास से दिल्ली में लोदी वंश के सुल्तान रहे सिकंदर लोदी ने दीक्षा ली थी और इसके बाद उन्हें तुगलकाबाद में 12 बीघा जमीन दान की थी जिस पर यह मंदिर बना. यह भी माना जाता है कि 1509 में जब संत रविदास बनारस से पंजाब की ओर जा रहे थे तो उन्होंने इस स्थान पर आराम किया था. कुछ यह भी कहते हैं कि यह मंदिर संत रविदास की याद में साल 1954 में बनवाया गया था. उधर, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार ने एक ट्वीट में लिखा है, ‘तुगलकाबाद स्थित प्राचीन मंदिर स्थल पर गुरु रविदास 1509 में खुद आए थे और मेरे पिता बाबू जगजीवन राम ने इसका जीर्णोद्धार कर एक मार्च 1959 को इसका उद्घाटन किया था.’

खैर, सच जो भी हो, इसमें कोई दोराय नहीं कि रविदास के अनुयायियों के लिए इस जगह का काफी महत्व है. इस मंदिर से सिख समाज की आस्था भी जुड़ी हुई थी. माना जाता है कि संत रविदास की वाणी का एक बड़ा हिस्सा शबद के रूप में गुरु ग्रंथ साहिब में मौजूद है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस ढहाने का आदेश क्यों दिया?

डीडीए का कहना है कि रविदास मंदिर का निर्माण संरक्षित वन क्षेत्र में किया गया था. उसके मुताबिक मंदिर का संचालन करने वाली समिति से कई बार इसे हटाने के लिए कहा गया, लेकिन उसने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया. फिर मामला अदालतों में गया. आखिर में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी मंदिर को नहीं हटाया गया. इसके बाद नौ अगस्त को शीर्ष अदालत ने कड़े शब्दों में इसे अपनी अवमानना बताया और आदेश दिया कि 24 घंटे के भीतर डीडीए इस ढांचे को ढहा दे.

सोशल मीडिया पर कई इस कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार और डीडीए को दोषी ठहरा रहे हैं. मीरा कुमार ने लिखा है, ‘सरकार मंदिर के मामले में सावधानी से काम लेती है. फिर गुरु रविदास जी के तुगलकाबाद प्राचीन मंदिर को क्यों तोड़ा गया? क्या इस पवित्र मंदिर को इसलिए तोड़ा गया क्योंकि गुरु जी के भक्त दलित हैं. परन्तु गुरु जी तो सभी के हैं.’ दिल्ली के समाज कल्याण मंत्री राजेंद्र पाल गौतम का भी कहना है कि केंद्र सरकार और डीडीए चाहते तो इस मंदिर को बचा सकते थे, लेकिन उन्होंने संत रविदास को मानने वाले 30-35 करोड़ लोगों की आस्था का जरा भी ध्यान नहीं रखा.