प्रसिद्ध ब्रिटिश पत्रकार और बीबीसी इंडिया के पूर्व संवाददाता सर विलियम मार्क टुली ने गुरुवार को कहा कि भारतीय तंत्र में कई असंतुलन इस ‘गलतफहमी’ की वजह से हैं कि संसद संप्रभु है और वह जो चाहे बिना रोकटोक कर सकती है. मार्क टुली ने यह बात मुंबई में सेंट जेवियर कॉलेज के वार्षिक कार्यक्रम में कही.

सेंट जेवियर कॉलेज के वार्षिक कार्यक्रम के अपने संबोधन में मार्क टुली ने कहा, ‘लोकतंत्र संस्थानों की वजह से काम करता है, इसलिये सरकार में उनकी भूमिका पर जोर दिया जाना चाहिए.’ उन्होंने कहा, ‘लोगों के प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त की गई उनकी संप्रभुता पूर्ण रूप से ठोस संप्रभुता नहीं है. संसद को पूर्ण शासक नहीं कहा जा सकता.’

मार्क टुली ने कहा, ‘हर किसी का पाला ऐसे राजनेताओं से पड़ा होगा, जो कहते हैं, तुम नहीं जानते हो मैं कौन हूं? जबकि यह स्वायत्तता सीमित है या इसे सीमित होनी चाहिए और उन्हें यह पता होना चाहिए कि उनकी सीमाएं क्या हैं.’ मार्क टुली ने कहा कि संसद की संप्रभुता के साथ लोकतंत्र में संस्थानों की स्वायत्ता भी महत्वपूर्ण होती है. अपने संबोधन में उन्होंने इस बात की ओर इशारा किया कि कैसे राजनीतिक तंत्र नौकरशाही, पुलिस और न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बनाकर उनके निर्णयों को प्रभावित करता है.