‘जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान को लेकर चिंतित होने की जरूरत नहीं है.’

— सत्यपाल मलिक, जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल

सत्यपाल मलिक ने यह बात श्रीनगर के शेर-ए-कश्मीर स्टेडियम में तिरंगा फहराने के बाद दिए अपने संबोधन में कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘सशस्त्र बलों की लगातार कार्रवाई से आतंकवादियों ने हार मान ली है.’ इसके साथ ही म​लिक का यह भी कहना था, ‘केंद्र की मौजूदा सरकार आतंकवाद को कतई बर्दाश्त न करने की नीति पर चल रही है.’

‘एक देश एक विधान के बाद अब एक देश एक चुनाव की बारी है.’

— नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री

नरेंद्र मोदी ने यह बात गुरुवार को लाल किले की प्राचीर से दिए स्वतंत्रता दिवस के अपने संबोधन के दौरान कही. लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ कराए जाने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने यह भी कहा कि देश को महान बनाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम होगा और ऐसी प्रक्रियाओं को निरंतर चलते रहना चाहिए.


‘समाज के संकल्प की वजह से अनुच्छेद 370 हटाया जा सका.’

— मोहन भागवत, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख

मोहन भागवत ने यह बात महाराष्ट्र के नागपुर स्थित राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के मुख्यालय में आयोजित स्वतंत्रता दिवस समारोह के दौरान दिए संबोधन में कही. इस मौके पर उन्होंने यह भी कहा, ‘आज का दिन देश की आजादी के लिए दिए बलिदानों को याद करने और इसके लिए अपना संकल्प फिर से दोहराने का है.’


‘यह एक गलतफहमी है कि लोकतंत्र में संसद संप्रभु है.’

— मार्क टुली, चर्चित पत्रकार

मार्क टुली ने यह बात एक कार्यक्रम के दौरान कही. इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा, ‘जनता के प्रतिनिधियों द्वारा व्यक्त संप्रभुता पूर्ण रूप से ठोस संप्रभुता नहीं है, इसलिए संसद को पूर्ण शासक नहीं कहा जा सकता.’ उन्होंने आगे कहा, ‘लोकतंत्र संस्थानों की वजह से काम करता है. ऐसे में इनकी स्वायत्ता भी महत्वपूर्ण है.’ इसी मौके पर मार्क टुली ने इशारों में यह भी बताया कि कैसे राजनीतिक तंत्र नौकरशाही, पुलिस और न्यायिक व्यवस्था पर दबाव बनाकर उनके निर्णयों को प्रभावित करता है.


‘क्या दुनिया खामोशी के साथ कश्मीर में स्रेब्रेनिका की तरह मुसलमानों के नरसंहार और नस्लीय सफाये का गवाह बनेगी?’

— इमरान खान, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री

इमरान खान ने यह बात एक ट्वीट के जरिये जम्मू-कश्मीर में लगाई गई पाबंदियों और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती के मद्देनजर कही. इसी ट्वीट से उन्होंने यह भी कहा, ‘मैं विश्व समुदाय को आगाह करना चाहता हूं कि अगर ऐसा कुछ हुआ तो इसके गंभीर परिणाम निकलेंगे. इसकी वजह से मुस्लिम समुदाय में कट्टरता बढ़ेती और हिंसा का चक्र शुरू हो जाएगा.’ इसके साथ ही इमरान खान का यह भी कहना था, ‘नरेंद्र मोदी के जरिये हम गुजरात में पहले भी मुसलमानों के संहार का उदाहरण देख चुके हैं.’