उत्तराखंड में गुरुवार को पत्थर मार त्योहार ‘बग्वाल’ मनाया गया. इसमें करीब सौ लोगों के घायल होने की खबर है. उत्तराखंड के चंपावत जिले के देवीधुरा मंदिर पर हर साल रक्षाबंधन के दिन बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा होते हैं और बाराही देवी को खुश करने के लिए एक-दूसरे पर पत्थर फेंकते हैं. स्थानीय लोगों का मानना है कि देवी रक्तपात के बाद ही खुश होती है.

डेक्कन क्रॉनिकल के मुताबिक गुरुवार को त्योहार के रूप में हुई पत्थरबाजी करीब दस मिनट चली. मंदिर के मुख्य पुजारी बीसी जोशी ने बताया कि इस दौरान करीब सौ लोग घायल हो गए. उन्होंने त्योहार का इतिहास बताते हुए कहा, ‘पुराने समय में देवी को खुश करने के लिए हर साल इंसान की बलि दी जाती थी. पुरानी कहानी के मुताबिक एक वृद्ध महिला को अपने इकलौते पोते की बलि देनी थी, लेकिन उसने देवी से पोते के लिए दया मांगी.’

पुजारी ने आगे बताया कि देवी ने महिला की प्रार्थना स्वीकार कर ली. बाद में वह भक्तों के सपनों में आई और उनसे बग्वाल मनाने को कहा. पुजारी के मुताबिक देवी ने कहा कि वे त्योहार में पत्थरबाजी कर इतना खून बहाएं जो एक इंसान के खून के बराबर हो जाए. ऐसा होने के बाद पुजारी के इशारे पर त्योहार रोक दिया जाता है. उत्तराखंड के इस त्योहार पर हाई कोर्ट ने प्रतिबंध लगाया हुआ है. लेकिन स्थानीय लोग फिर भी इसे मनाते हैं.