अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को सातवें दिन सुनवाई की. इस मौके पर रामलला विराजमान की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता सीएस वैद्यनाथन पेश हुए और 2.77 एकड़ की विवादित जमीन पर उन्होंने अपना दावा जताया. सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुवाई में मामला सुन रही पांच सदस्यों वाली इस खंडपीठ को उन्होंने कुछ नक्शे और तस्वीरें भी दिखाईं. साथ ही वैद्यनाथन ने कहा कि विवादित स्थल की खुदाई में कुछ स्तंभ मिले हैं जिन पर शिव, कृष्ण, हनुमान और अन्य देवी-देवताओं की तस्वीरें दिखती हैं.

इन तस्वीरों और नक्शे के आधार पर वैद्यनाथन ने तर्क दिया कि किसी मस्जिद में ऐसे स्तंभ नहीं पाए जाते. इससे पुष्टि होती है कि इस जगह पर मस्जिद नहीं बल्कि मंदिर था. इसकी बनावट भी इसके मंदिर होने को प्रमाणित करती है. उन्होंने आगे ​कहा कि विवादित स्थल के पक्के निर्माण में जहां तीन गुंबद बनाए गए थे वहां बाल रूप में राम की मूर्ति थी. वैद्यनाथन का यह भी कहना था कि कहीं पर नमाज पढ़े जाने का यह मतलब नहीं कि उसे मस्जिद मान लिया जाना चाहिए. सड़कों पर भी नमाज पढ़ी जाती है और इसका यह अर्थ नहीं कि सड़क को भी मस्जिद मान लिया जाए.

रामलला के वकील ने यह भी कहा कि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की रिपोर्ट से भी साफ होता है कि मस्जिद किसी खाली मैदान पर नहीं बल्कि बहुत बड़े ढांचे के ऊपर बनी थी. इस दौरान जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने वैद्यनाथन से पूछा कि वहां एक क्रब भी पाई गई है तो इस पर उन्होंने जवाब में कहा कि वह कब्र बहुत बाद के समय की है.