संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कल अपने ‘दोस्ती के हाथ’ से पाकिस्तानी पत्रकारों को चौंका दिया. मौका था जम्मू-कश्मीर पर भारत के हालिया फैसले को लेकर हुई सुरक्षा परिषद की बैठक के बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का. उनसे पहले चीन और पाकिस्तान के प्रतिनिधि अपना पक्ष रख चुके थे. वे सिर्फ अपना बयान पढ़कर और पत्रकारों से कोई सवाल लिए बिना निकल गए थे. लेकिन जब सैयद अकबरुद्दीन की बारी आई तो उन्होंने पहले वहां मौजूद तीन पाकिस्तानी पत्रकारों से अपने सवाल पूछने को कहा. इसी दौरान एक पत्रकार ने उनसे पूछा, ‘आप पाकिस्तान के साथ बातचीत कब शुरू करेंगे?’

इसके बाद जो हुआ वह न सिर्फ चौंकाने वाला था बल्कि उससे माहौल भी हल्का-फुल्का हो गया. सैयद अकबरुद्दीन ने कहा, ‘चलिये मैं आपसे हाथ मिलाकर ही शुरूआत करता हूं.’ इसके बाद वे पोडियम छोड़कर आगे बढ़े और तीनों पाकिस्तानी पत्रकारों से हाथ मिलाया. पोडियम पर वापस जाकर उन्होंने कहा, ‘मैं आपको बता दूं कि हमने शिमला समझौते के लिए प्रतिबद्ध रहने की बात कहकर पहले ही दोस्ती का हाथ बढ़ा दिया है.अब पाकिस्तान की प्रतिक्रिया का इंतजार करते हैं.’

1985 में भारतीय विदेश सेवा में आने वाले सैयद अकबरुद्दीन के पिता एस बदरुद्दीन हैदराबाद स्थित उस्‍मानिया यूनिवर्सिटी के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष थे जो बाद में कतर में भारत के राजदूत भी बनाए गए. अपनी हाजिरजवाबी के लिए मशहूर सैयद अकबरुद्दीन पश्चिम एशिया मामलों के विशेषज्ञ माने जाते हैं. वे 2012 से 2015 तक भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्‍ता भी रह चुके हैं.