भारत और भूटान के बीच लंबे अरसे तक प्रमुख रूप से जलविद्युत परियोजनाओं या हाइड्रो-पावर प्रोजेक्ट्स में ही साझेदारी रही है, लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ताजा यात्रा के बाद यह साझेदारी अंतरिक्ष क्षेत्र तक में होने जा रही है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दो दिवसीय यात्रा पर आज ही भूटान पहुंचे हैं. यहां औपचारिक स्वागत समारोह के बाद नरेंद्र मोदी ने राजधानी थिम्पू में भूटान के प्रधानमंत्री लोतै शेरिंग के साथ मुलाकात की है. इसके बाद दोनों नेताओं ने सात करोड़ रुपये की लागत से एक अर्थ स्टेशन का शुभारंभ किया है. भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) की मदद से तैयार इस स्टेशन से भूटान के संचार, लोक प्रसार और आपदा प्रबंधन में मदद मिलेगी.

हालांकि मोदी की इस यात्रा से यह भी साफ हुआ है कि जलविद्युत परियोजनाएं भारत और भूटान की साझेदारी को आगे भी मजबूत बनाएंगे. इसी सिलसिले में भारतीय प्रधानमंत्री ने यहां शनिवार को मांगदेछू ऊर्जा संयंत्र का भी शुभारंभ किया है और भारत-भूटान जल-विद्युत सहयोग के पांच दशक पूरे होने के उपलक्ष्य में टिकट भी जारी किया है.

इसके अलावा नरेंद्र मोदी ने शब्दरूंग नामग्याल द्वारा 1629 में निर्मित सिमटोखा जोंग में खरीदारी कर भूटान में रूपे कार्ड की भी शुरुआत की. सिमटोखा जोंग भूटान में सबसे पुराने स्थलों में एक है और यह मठ और प्रशासनिक मामलों का केंद्र है. भूटान में रुपे कार्ड की शुरुआत से डिजिटल भुगतान को बढ़ावा मिलेगा. साथ ही पर्यटन-व्यापार जैसे क्षेत्रों को भी इससे लाभ होगा. शनिवार को दोनों देशों ने अंतरिक्ष अनुसंधान, विमानन, आईटी, ऊर्जा और शिक्षा के क्षेत्र में 10 सहमति पत्र (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं. इसके बाद भूटान के प्रधानमंत्री के साथ एक संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों से बात करते हुए मोदी ने इस पड़ोसी देश के विकास में सहयोग को भारत के लिए ‘गर्व’ की बात बताते हुए कहा है, ‘भूटान जैसा दोस्त और पड़ोसी भला कौन नहीं चाहेगा?’

नरेंद्र मोदी का आगे यह भी कहना था, ‘भारत और भूटान की साझा आध्यात्मिक विरासत है. उज्ज्वल भविष्य वाले इन दोनों देशों के आपसी रिश्तों का गौरवशाली इतिहास रहा है. भारत के 130 करोड़ लोगों के मन में भूटान के प्रति विशेष स्थान है और मैं भी अपनी सरकार के दूसरे कार्यकाल के शुरुआती दिनों में यहां आकर बेहद खुश हूं.’