आतंकी गतिविधियों के आरोप में भारत में वांछित जाकिर नाइक पर मलेशिया में भाषण देने पर रोक लगा दी गई है. स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक ऐसा राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में और सामुदायिक सौहार्द बनाए रखने के लिए किया गया है. इस विवादित इस्लामिक प्रचारक को हिंदुओं के खिलाफ नस्लीय टिप्पणी करने के मामले में सोमवार को दूसरी बार तलब किया गया था. इससे पहले प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद का बयान आया था कि जाकिर नाइक को देश में राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने की इजाजत नहीं है.

अपनी विवादित टिप्पणी में जाकिर नाइक का कहना था कि मलेशिया के हिंदू भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ज्यादा वफादार हैं. उसने यह भी कहा था कि मलेशिया में हिंदुओं को उससे 100 गुना ज्यादा अधिकार मिले हुए हैं जितने मुस्लिम अल्पसंख्यकों को भारत में हैं. इसके बाद उस पर देश में सामुदायिक तनाव भड़काने की कोशिश के आरोप लग रहे हैं. कई मंत्रियों ने जाकिर नाइक को मलेशिया से बाहर निकालने की मांग भी की है. मलेशिया की आबादी में हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब साढ़े छह फीसदी है.

जाकिर नाइक पर भारत में मनी लॉन्डरिंग और भड़काऊ भाषण जैसे आरोपों में मुकदमे चल रहे हैं. उसके खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला जुलाई 2016 में बांग्लादेश की राजधानी ढाका में हुए आतंकी हमले के बाद शुरू हुआ था. आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट के उस हमले में 20 लोगों की मौत हो गई थी. हमलावरों में से तीन जाकिर नाइक के प्रशंसक बताए गए. इसके बाद राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने उसके खिलाफ जांच शुरू की थी