कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम को दिल्ली हाईकोर्ट ने बड़ा झटका देते हुए आईएनएक्स मीडिया मामले में उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी है. मंगलवार को यह फैसला जस्टिस सुनील गौड़ की अदालत ने सुनाया. साथ ही इस मामले को मनी लॉन्डरिंग के बाकी तमाम केसों जैसा बताते हुए कहा कि इसमें जमानत नहीं दी जा सकती. इससे पहले इसी साल 25 जनवरी को अदालत ने पी चिदंबरम की अग्रिम जमानत याचिका पर फैसला सुरक्षित कर लिया था. इस मामले में राहत पाने के लिए पूर्व वित्त मंत्री के पास सुप्रीम कोर्ट का विकल्प अब भी शेष है.

आईएनएक्स मीडिया मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने 15 मई 2017 को एफआईआर दर्ज की थी. इस एफआईआर के मुताबिक आईएनएक्स मीडिया लिमिटेड को 2007 में 305 करोड़ रुपये दिलवाने के लिए फॉरेन इन्वेस्टमेंट प्रमोशन बोर्ड (एफआईपीबी) की स्वीकृति की प्रक्रिया में कई अनियमितताएं बरती गई थीं. एफआईपीबी वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आता है और तब वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे.

इसके बाद बीते साल इस मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने मनी लॉन्डरिंग का केस दर्ज किया था. वहीं इस मामले में सीबीआई और ईडी पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदंबरम को भी गिरफ्तार कर चुकी हैं. फिलहाल कार्ति चिदंबरम जमानत पर हैं. भ्रष्टाचार के इस मामले में बीती चार जुलाई को तब अहम मोड़ आया था जब आईएनएक्स मीडिया की मालकिन और मामले में आरोपित इंद्राणी मुखर्जी सरकारी गवाह बन गई थीं. तब इंद्राणी ने सीबीआई को अपने एक बयान में बताया था कि एफआईपीबी की स्वीकृति पाने के लिए उन्होंने और उनके पति पीटर मुखर्जी ने कार्ति चिदंबरम को 10 लाख डॉलर (करीब सात करोड़ रुपये) दिए थे.