केंद्रीय गृह मंत्रालय ने कहा है कि राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची में नाम नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि इससे कोई व्यक्ति अपने आप ही विदेशी नागरिक घोषित हो जाएगा. गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में यह निर्णय भी किया गया कि एनआरसी से छूटे लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने के लिए राज्य सरकार पर्याप्त व्यवस्था करेगी ताकि सूची में शामिल नहीं किए जाने के खिलाफ अपील करने का उन्हें पूरा मौका मिल सके.

गृह मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि विदेशी नागरिक कानून 1946 और विदेशी नागरिक (न्यायाधिकरण) आदेश 1964 के प्रावधानों के तहत विदेशी नागिरक न्यायाधिकरण के पास ही किसी व्यक्ति को विदेशी घोषित करने का अधिकार है. इसलिए, एनआरसी से किसी व्यक्ति का नाम छूटने का यह मतलब नहीं है कि उसे स्वत: विदेशी घोषित किया जा रहा है. गृह मंत्रालय के बयान के मुताबिक, ‘राज्य सरकार एनआरसी से बाहर होने वाले जरूरतमंद लोगों को कानूनी सहायता मुहैया कराने की व्यवस्था भी करेगी. अंतिम एनआरसी सूची में नाम शामिल नहीं हो पाने वाले हर किसी के लिए तय समय में अपील कर पाना मुमकिन नहीं है. इसलिए गृह मंत्रालय विदेशी न्यायाधिकरण में अपील दायर करने के मौजूदा समय को 60 दिन से बढ़ाकर 120 दिन करने के लिए नियमों में संशोधन करेगा.’

असम के निवासियों से संबंधित अंतिम राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण सूची 31 अगस्त को प्रकाशित की जाएगी. एनआरसी की अंतिम सूची के प्रकाशन तिथि नजदीक आने के साथ उन लोगों की आशंकायें बढ़ती जा रही हैं, जिनके नाम इससे छूट गए हैं. इन आशंकाओं को दूूूर करने के लिए और आगामी स्थिति से निपटने को लेकर केंद्र और असम सरकार ने हाल के हफ्तों में गहन विचार-विमर्श किया है.