पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री शिरीन माजरी ने संयुक्त राष्ट्र (यूएन) से प्रियंका चोपड़ा को ‘यूएन गुडविल एम्बेसडर फॉर पीस’ के पद से हटाने की मांग की है. इसे लेकर उन्होंने यूनिसेफ की एग्जिक्यूटिव डायरेक्टर हेनरिएटा फोर को एक चिट्ठी लिखी है. शिरीन माजरी ने अपने ट्विटर अकाउंट से इस चिट्ठी को शेयर भी किया है.

पाकिस्तान की मानवाधिकार मंत्री ने इस चिट्ठी में लिखा है, ‘प्रियंका चोपड़ा परमाणु और दूसरे युद्धों का समर्थन करती हैं. उनका ऐसा करना संयुक्त राष्ट्र की विश्वसनीयता को कमजोर करता है. इसलिए यूनिसेफ को जल्द से जल्द उन्हें इस पद से हटा देना चाहिए वरना वैश्विक स्तर पर गुडविल एम्बेसडर जैसी नियुक्तियां हास्यास्पद बनकर रह जाएंगी.’

इसी चिट्ठी में माजरी ने भारत सरकार की तरफ से जम्मू-कश्मीर से विशेष राज्य का दर्जा वापस लिए जाने का जिक्र भी किया है. वे लिखती हैं, ‘इसकी वजह से भारत के हिस्से वाले कश्मीर में सुरक्षाबलों ने महिलाओं और बच्चों पर पैलेट गन का इस्तेमाल तेज कर दिया है. इसके अलावा मोदी सरकार पूर्वोत्तर भारत के असम में 40 लाख मुसलमानों को उनकी नागरिकता से वंचित कर रही है. भारत के ये कदम जातीय सफाई, नस्लवाद और नरसंहार के नाजी सिद्धांत जैसे हैं.’

वैसे यह पहला मौका नहीं जब किसी पाकिस्तानी नागरिक या पाकिस्तानी समर्थकों की तरफ से प्रियंका चोपड़ा पर युद्ध समर्थक होने के आरोप लगाए गए हों. इससे पहले बीती फरवरी में वायु सेना की ‘बालाकोट एयर स्ट्राइक’ के बाद प्रियंका चोपड़ा ने एक ट्वीट के जरिये ‘जय हिंद # भारतीय सशस्त्र सेना’ कहा था. तब उनके उस ट्वीट को पाकिस्तान के समर्थकों ने परमाणु युद्ध भड़काने वाला बताया था.

इसके अलावा बीते दिनों लॉस एंजेलिस में एक कार्यक्रम के दौरान आयशा मलिक नाम की एक पाकिस्तानी युवती ने प्रियंका चोपड़ा को उनके ‘ढोंगी’ और ‘परमाणु युद्ध का ‘समर्थक’ होने की बात कही थी. तब प्रियंका चोपड़ा ने उसे उसकी ‘गलतफहमी’ करार दिया था साथ ही खुद के एक ‘राष्ट्रभक्त’ होने की बात भी कही थी.