रोहिंग्या मुसलमानों को लेकर बांग्लादेश सरकार की चिंता एक बार फिर बढ़ गई है. इन्हें बांग्लादेश से म्यामांर भेजने की ताजा कवायद का नतीजा भी शून्य रहा है. गुरूवार को बांग्लादेश में रोहिंग्या शिविरों के बाहर वाहन दिन भर खड़े रहे, लेकिन उनमें कोई भी रोहिंग्या मुसलमान सवार नहीं हुआ.

साल 2017 में सैन्य कार्रवाई के चलते सात लाख से ज्यादा रोहिंग्या मुसलमान म्यामांर से भागकर बांग्लादेश पहुंचे थे. इसके बाद से ही इन्हें फिर म्यांमार पहुंचाने की कवायद की जा रही है. इससे पहले बीते साल नवंबर में भी इन्हें वापस भेजने की कोशिश की गयी थी, लेकिन वह विफल रही.

पीटीआई के मुताबिक बांग्लादेशी अधिकारियों ने गुरूवार शाम को मीडिया को बताया, ‘3,450 रोहिंग्याओं के पहले बैच को ले जाने के लिए मुहैया कराए गए वाहन शिविरों में सुबह नौ बजे पहुंचे गए थे. लेकिन छह घंटे से भी अधिक समय बीतने के बाद कोई नहीं आया और वाहन खाली लौट गए.’ अधिकारियों ने कहा कि वे शुक्रवार को फिर कोशिश करेंगे.

बांग्लादेश के शरणार्थी आयुक्त मोहम्मद अबुल कलाम ने पत्रकारों से कहा, ‘हमने 295 रोहिंग्या परिवारों का साक्षात्कार किया, लेकिन किसी ने भी अभी स्वदेश लौटने की इच्छा नहीं जतायी है.’

बांग्लादेशी मीडिया के मुताबिक म्यांमार से आए रोहिंग्या मुसलमान काफी डरे हुए हैं, ये लोग अपनी सुरक्षा की गारंटी मिले बिना वापस लौटना नहीं चाहते. साथ ही इनका यह भी कहना है कि म्यामांर सरकार उन्हें नागरिकता देने की गारंटी दे.

रोहिंग्या नेता नोसिमा ने एक बयान जारी कहा है, ‘म्यामांर सरकार से जुड़े लोगों और सुरक्षा बलों ने हमारी महिलाओं के साथ बलात्कार किया और हमारे लोगों की हत्या की, इसलिए हमें सुरक्षा की जरूरत है. बिना सुरक्षा के हम कभी वापस नहीं जाएंगे.’

दक्षिण पूर्व बांग्लादेश में एक शिविर में रह रहे रोहिंग्या मुस्लिम मोहम्मद इस्लाम का कहना था, ‘हमें नागरिकता, सुरक्षा की असली गारंटी और मूल जन्म स्थान का वादा चाहिए. हमें स्वदेश भेजे जाने से पहले इन सभी मुद्दों पर म्यामांर सरकार से बात की जानी चाहिए.’