लोकतांत्रिक जनता दल के नेता शरद यादव ने दिल्ली के तुगलकाबाद में प्रशासन द्वारा संत रविदास का मंदिर तोड़े जाने पर विरोध जताया है. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार को इस बारे में उच्चतम न्यायालय में याचिका दाखिल करनी चाहिए कि वह अपने फैसले पर पुनर्विचार करे. दिल्ली के तुगलकाबाद में स्थित रविदास मंदिर को सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद तोड़ा गया था.

शरद यादव ने गुरुवार को इस बारे में जारी बयान में कहा, ‘मैं दिल्ली के तुगलकाबाद रोड पर करीब 500 साल पुराने संत रविदास के एक मंदिर को प्रशासन द्वारा तोड़े जाने के विरोध में खड़ा हूं.’ बयान में कहा गया है कि देश में जगह-जगह हो रहे प्रदर्शन दर्शाते हैं कि दलित वर्ग इससे कितना आहत हुआ है. शरद यादव ने कहा, ‘ मंदिर तोड़े जाने का फैसला उच्चतम न्यायालय के एक आदेश के बाद किया गया है. भारत सरकार को अपील करनी चाहिए थी कि इसको न गिराया जाये क्योंकि इससे दलितों की श्रद्धा जुडी हुई है. मगर सरकार ने ऐसा नहीं किया जो दुर्भाग्यपूर्ण है.’ शरद यादव ने कहा कि इस आदेश की समीक्षा के लिये सरकार तुरंत उच्चतम न्यायालय में एक याचिका दायर करे, जिससे इस मामले को लेकर व्याप्त तनाव की स्थिति को शांत किया जा सके.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने 10 अगस्त को संत रविदास का मंदिर गिरा दिया था. इसके बाद पूरे देश के दलित समुदाय में इसकी प्रतिक्रिया हुई है. संत रविदास का मंदिर गिराए जाने के खिलाफ दलित संगठनों ने बुधवार को दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन किया था. इस प्रदर्शन के हिंसक होने के बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा था.