सुप्रीम कोर्ट तुरंत तीन तलाक को अपराध करार देने वाले कानून की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए तैयार हो गया है. उसने इस संबंध में केंद्र सरकार को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. वरिष्ठ वकील सलमान खुर्शीद ने समस्त केरल जामियातुल उलेमा नाम के सुन्नी मुस्लिम संगठन की तरफ से यह याचिका दायर की है. उन्होंने कोर्ट को बताया कि तीन तलाक को कानून बना कर अपराध करार देने की कोई जरूरत नहीं थी, क्योंकि सुप्रीम कोर्ट ने पहले ही तुरंत तीन तलाक को अमान्य और अवैध घोषित कर दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से कहा गया कि संसद द्वारा पारित किया गया यह कानून मुस्लिम समुदाय से विशेष रूप से जुड़ा है. याचिका में कहा गया, ‘(कानून से) संबंधित विधेयक का मकसद तीन तलाक का खात्मा नहीं बल्कि मुस्लिम पतियों को सजा देना है. पतियों को कैद करके पत्नियों की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं की जा सकती.’

वहीं, सुनवाई कर रही दो सदस्यीय पीठ के सदस्य जस्टिस एनवी रमण ने कहा, ‘मुझे संदेह है. देखिए, हिंदू समाज में बाल विवाह और दहेज जैसी परंपराएं आज भी चल रही हैं. उन्हें भी अपराध करार दिया गया है. जब तीन तलाक की परंपरा अभी भी जारी है तो क्यों इसे अपराध करार नहीं देना चाहिए?’ हालांकि शीर्ष अदालत ने याचिका पर सुनवाई के हामी दे दी.