दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिक धरती पर एक ‘छोटे आकार का सूरज’ बनाने की कोशिश कर रहे हैं. फ्रांस में चल रही इस महापरियोजना की लागत 20 अरब यूरो (एक लाख 61,407 करोड़ रुपये) से ज्यादा है. भारत इसमें पूर्ण साझेदार के रूप में शामिल है. इंटरनेशनल थर्मोन्यूक्लियर एक्सपेरिमेंटल रिएक्टर्स (आईटीईआर) या ‘द पाथ’ नाम की इस परियोजना में हर जगह ‘मेड इन इंडिया’ की छाप है. यह 21वीं सदी की सबसे महंगी वैज्ञानिक परियोजना है. यानी इस परियोजना के जरिये भारत दुनिया के सबसे महंगे वैज्ञानिक प्रयास में साझेदारी कर रहा है.

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक इस परियोजना के तहत सौ से अधिक भारतीय अन्य देशों के वैज्ञानिकों के साथ मिल कर सूरज की ऊर्जा के वास्तविक स्रोत को पाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि दुनिया को असीमित स्वच्छ ऊर्जा मिल सके. रिपोर्ट की मानें तो इस परियोजना का सबसे महत्वपूर्ण कार्य भारत में ही हुआ है. यहां की लार्सन एंड टूब्रो कंपनी ने गुजरात में दुनिया का सबसे बड़ा रेफ्रिजरेटर तैयार किया है. आईटीईआर परियोजना से जुड़े इस विशाल रेफ्रिजरेटर की लंबाई आधे कुतुब मीनार के बराबर है जो पूरे रिएक्टर को कवर करेगा. इसके अलावा रिएक्टर से जुड़े कई अहम हिस्से भी भारत ने ही तैयार किए हैं.

भारत के अलावा अमेरिका, रूस, दक्षिण कोरिया, चीन, जापान और यूरोपीय संघ भी इस परियोजना में बराबर के साझेदार हैं. भारत ने इस प्रोजेक्ट में 17,500 करोड़ रुपये लगाने का वादा किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी हालिया फ्रांस यात्रा के दौरान इस परियोजना को लेकर फिर से सूची बनाने की बात कही थी. खबर के मुताबिक इस प्रोजेक्ट की लागत का दस प्रतिशत देकर भारत पूरी तकनीक को हासिल कर सकेगा. परियोजना के 2025 तक शुरू होने की उम्मीद है. वहीं, इसके तहत बिजली पैदा करने वाला पहला रिएक्टर 2040 तक पूरी तरह तैयार हो जाएगा.