प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि जम्मू-कश्मीर से धारा 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने का फैसला पूरी पारदर्शिता के साथ लोकतांत्रिक और संवैधानिक दायरे में रहकर किया गया है. उन्होंने यह बात संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के एक अखबार के साथ बातचीत के दौरान कही. इसके साथ उन्होंने यह भी कहा है, ‘धारा 370 निरस्त करने का फैसला इसलिए किया गया क्योंकि कुछ लोगों के स्वार्थ की वजह से जम्मू-कश्मीर का विकास प्रभावित हो रहा था. इस राज्य के अलग-थलग पड़ने से यहां के युवा आतंकवाद और कट्टरपंथ की राह पर चल पड़े थे. हमारा उद्देश्य उन्हें रोकना है.’ इस मौके पर नरेंद्र मोदी ने भारत के इस फैसले में यूएई के समर्थन की सराहना भी की.

इससे पहले नरेंद्र मोदी इसी शुक्रवार को फ्रांस से यूएई पहुंचे थे. वहीं शनिवार को उन्होंने वहां के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयेन से मुलाकात भी की. इस दौरान दोनों नेताओं ने भारत-यूएई के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत बनाने के अलावा क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर भी विस्तार से चर्चा की.

शनिवार को ही भारतीय प्रधानमंत्री को यूएई के सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ से भी सम्मानित किया गया. नरेंद्र मोदी से पहले रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन की महारानी एलिजाबेथ द्वितीय और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को भी इस सम्मान से सम्मानित किया जा चुका है.

अब इसी रविवार को नरेंद्र मोदी बहरीन में खाड़ी क्षेत्र के सबसे पुराने श्रीनाथजी मंदिर के पुनर्विकास के मौके पर उपस्थित रहेंगे. इसके बाद वे वहां से जी-7 की बैठक में शामिल होने के लिए वापस फ्रांस के बिआरिट्ज लौट जाएंगे. भारत को जी-7 के शिखर सम्मलेन में सहयोगी देश के तौर पर आमंत्रित किया गया है.