केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत जम्मू-कश्मीर से धारा-370 के प्रावधान हटाने से जुड़े फैसले को लेकर जानकारियां देने से मना कर दिया है. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक लखनऊ की एक सामाजिक कार्यकर्ता नूतन ठाकुर ने आरटीआई का यह आवदेन गृह मंत्रालय में दिया था.

इस आवेदन के जरिए नूतन ठाकुर ने जम्मू-कश्मीर से धारा-370 के प्रावधानों को हटाने के फैसले से जुड़ी गृह मंत्रालय की आधिकारिक फाइल की कॉपी मांगी थी. लेकिन मंत्रालय के सूचना अधिकारी ने यह कहकर संबंधित जानकारी देने से मना कर दिया कि ये जानकारियां आरटीआई कानून की धारा 8(1) के तहत आती हैं और इसलिए सार्वजनिक नहीं की जा सकतीं. आरटीआई कानून में इस धारा के तहत कुछ विशेष प्रकार की जानकारियां सार्वजनिक न करने की छूट है. इस फैसले के खिलाफ नूतन ने एक बार फिर इस दलील के साथ पहली अपील दाखिल की है कि मंत्रालय ने यह स्पष्ट नहीं किया कि आरटीआई कानून की धारा 8(1) इस मामले में किस तरह लागू हो रही है.

इससे पहले प्रधानमंत्री कार्यालय भी इस मामले में जानकारियां देने से मना कर चुका है. भारत सरकार ने पांच अगस्त को जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाली संविधान की धारा-370 के अधिकतर प्रावधानों को खत्म कर दिया था. इसके साथ ही उसी दिन संसद में जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पेश किया गया था. इसके तहत राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने का फैसला किया गया है.

विपक्ष ने केंद्र सरकार के इन फैसलों का तब संसद में काफी विरोध किया था. विपक्ष खासकर कांग्रेस का आरोप है कि केंद्र ने जम्मू-कश्मीर में लगे राष्ट्रपति शासन का फायदा उठाया है और इन फैसलों को लेकर संवैधानिक प्रक्रिया का पालन नहीं किया.