अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने आरबीआई द्वारा आरक्षित कोष से सरकार को बड़ी मात्रा में रकम दिए जाने के फैसले की कड़ी आलोचना की है. एआईबीईए ने कहा है कि रिजर्व बैंक को सरकार की जरूरतों को पूरा करने का ‘एक्सटेंशन काउंटर’ नहीं बनाया जा सकता है.

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ (एआईबीईए) ने इस मसले पर जारी अपने बयान में कहा, ‘आज जो हो रहा है कि वह काफी चिंता की बात है. आरबीआई पर सरप्लस से पैसे देने के लिए सरकार की ओर से दबाव डाला जा रहा है. सरकार इस पैसे से अपने राजकोषीय घाटे को पूरा करना चाहती है.’ बैंक कर्मचारी संघ ने चिंता जताते हुए कहा कि 1.76 लाख करोड़ की भारी राशि के हस्तांतरण के बाद रिजर्व बैंक के पास आपात आर्थिक हालात से बचाव की गुंजाइश बहुत कम रह गई है.

एआईबीईए के महासचिव सीएच वेंकटचलम ने कहा कि सरकार अधिशेष के हस्तांतरण के नाम पर आरबीआई पर दबाव बनाने के तरीके अपना रही है, रिजर्व बैंक के जिन शीर्ष अधिकारियों ने इसका विरोध किया उन्हें नौकरी छोड़कर जाना पड़ा. वेंकटचलम ने यह भी कहा कि इस समय रिजर्व बैंक द्वारा आकस्मिक कोष के तहत रखी जाने वाली राशि सबसे निचला स्तर पर आ गई है, इससे भविष्य में रिजर्व बैंक का लचीला रुख प्रभावित हो सकता है.

रिजर्व बैंक के बोर्ड ने बीते सोमवार को बिमल जालान समिति की सिफारिशों को स्वीकार करते हुए सरकार को 1,76,051 करोड़ रुपये जारी करने का फैसला किया था.