देश में नया कर कानून बनाने के लिए गठित की गई टास्क फोर्स ने सरकार को मौजूदा टैक्स स्लैब में बदलाव करने के सुझाव दिए हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक अगर इन सुझावों को मंजूरी मिलती है तो देश के अधिकतर करदाताओं को बड़ी राहत मिल सकती है. इनमें उन करदाताओं की संख्या सबसे ज्यादा होगी जिनकी सालाना आय पांच से दस लाख रुपये है. प्रत्यक्ष कर नियमावली को लेकर बनाई गई टास्क फोर्स ने सुझाव दिया है कि इस आय वर्ग के करदाताओं का टैक्स आधा कर दस प्रतिशत कर दिया जाए. हालांकि अभी यह केवल सुझाव है जिसे सरकार की मंजूरी मिलना बाकी है. फिलहाल उसका ध्यान कर राजस्व बढ़ाने पर है. इसलिए देखना होगा कि इस सुझाव को वह मानती है या नहीं.

हिंदुस्तान टाइम्स ने मामले से जुड़े दो सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर यह रिपोर्ट प्रकाशित की है. इसके मुताबिक पिछले हफ्ते अपनी रिपोर्ट सरकार के सामने रखते हुए टास्क फोर्स ने सिफारिश की कि टैक्स स्लैब की संख्या चार से बढ़ा कर पांच कर दी जाए और ज्यादातर कर दरों में कमी हो. उसका यह भी कहना है कि पहले टैक्स स्लैब (शून्य से ढाई लाख रुपये) में कोई बदलाव न हो. इस स्लैब के तहत आने वाले करदाताओं को कोई टैक्स नहीं देना होता. दूसरा स्लैब ढाई लाख रुपये से पांच लाख रुपये तक की आय वालों के लिए है. इसके तहत उन्हें अपनी आय पर पांच प्रतिशत टैक्स देना होता है. टास्क फोर्स का सुझाव है कि सरकार इस स्लैब को ढाई लाख से दस लाख रुपये तक कर दे और इस पर दस प्रतिशत टैक्स दर की व्यवस्था करे. हालांकि उसने सिफारिश में कहा कि इस स्लैब के तहत पांच लाख रुपये तक की आय पर दी गई छूट बनाए रखी जाए.

मौजूदा टैक्स स्लैब के मुताबिक पांच से दस लाख रुपये तक की आय वालों को 20 प्रतिशत टैक्स देना होता है. अखबार ने सूत्रों के हवाले से बताया कि अगर टास्क फोर्स की सिफारिश को मंजूरी मिली तो यह दर आधी हो जाएगी. वहीं, दस से 20 लाख रुपये तक की आय वालों को 20 प्रतिशत टैक्स देना होगा. फिलहाल इस आय वर्ग को 30 प्रतिशत टैक्स देना होता है. इसके अलावा टास्क फोर्स के पैनल ने चौथा स्लैब बनाने का प्रस्ताव रखा है. इसमें उसने कहा है कि 20 लाख से दो करोड़ रुपये तक की आय वाले करदाताओं पर 30 प्रतिशत टैक्स लगाया जाए.

खबर के मुताबिक अगर इस प्रस्ताव को स्वीकृति मिलती है तो साल में दो करोड़ रुपये कमाने वाले करदाता 8.5 लाख रुपये तक की बचत कर पाएंगे. वहीं, उससे ऊपर की आय वालों को पांचवें स्लैब में रखते हुए 35 प्रतिशत टैक्स लगाए जाने का सुझाव दिया गया है. उधर, सरकार के एक अधिकारी ने नाम नहीं जाहिर करने की शर्त पर बताया कि टास्क पैनल द्वारा पेश की गई रिपोर्ट का मूल्याकंन किया जाना अभी बाकी है. उन्होंने साफ किया कि यह जरूरी नहीं है कि पैनल की सभी सिफारिशों को मान लिया जाएगा.