बिहार विधानसभा चुनाव में अभी कम से कम एक साल बाकी है लेकिन इससे पहले यहां विपक्षी महागठबंधन में अभी से फूट पड़नी शुरू हो गई है, और इसकी वजह है मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवारी. इंडिया टुडे की एक खबर के मुताबिक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के नेता जीतनराम मांझी ने अप्रत्यक्ष रूप से मुख्यमंत्री पद पर दावेदारी ठोकी है. उन्होंने कहा है कि अगर 2020 में महागठबंधन चुनाव जीतता है तो वे मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभालने को तैयार हैं. दूसरी तरफ महागठबंधन की सबसे बड़ी पार्टी राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पहले ही कह चुकी है कि उसके नेता तेजस्वी यादव विपक्ष की तरफ से मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे.

मांझी ने मुख्यमंत्री पद पर अपनी दावेदारी जताते हुए दलील दी है, ‘मुख्यमंत्री पद संभालने का मेरे पास नौ महीने का अनुभव है और अगर मुझे गठबंधन का नेता चुना जाता है तो मैं एक फिर अच्छा मुख्यमंत्री साबित हो सकता हूं.’ ‘हम’ के नेता के इस बयान पर राजद की तरफ से तंजभरी प्रतिक्रिया में कहा गया है कि वे जल्दबादी दिखा रहे हैं. राजद नेता शिवानंद तिवारी ने शुक्रवार को कहा है, ‘मांझी एक सम्माननीय वरिष्ठ नेता हैं. उन्हें मीडिया में खुद को मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर पेश करने की जल्दबाजी नहीं दिखानी चाहिए. इस तरह के गंभीर मुद्दों पर मीडिया में फैसला नहीं होता. इसका फैसला गठबंधन पार्टियों की बैठक में किया जाएगा.’ वहीं पार्टी के एक दूसरे नेता भाई वीरेंद्र का कहना है कि तेजस्वी यादव को पहले ही मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के रूप में चुन लिया गया है और इस फैसले में अब कोई बदलाव नहीं होगा.

वहीं दूसरी तरफ सूत्रों के मुताबिक महागठबंधन की एक और बड़ी सहयोगी कांग्रेस ने तेजस्वी की क्षमताओं पर सवाल उठाए हैं और स्पष्ट किया है कि वे राजद के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार हैं, महागठबंधन के नहीं. दरअसल बीते लोकसभा चुनाव में राजद बिहार की एक भी सीट जीतने में कामयाब नहीं हो पाई थी और तब से कांग्रेस के भीतर एक तबका राजद नेता पर सवाल खड़े करता रहा है. हालांकि महागठबंधन में शामिल पूर्व केंद्रीय मंत्री उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक समता पार्टी और मुकेश सहनी की विकासशील इंसान पार्टी का समर्थन तेजस्वी यादव के साथ है.